बाजार के विपरीत Jubilant Ingrevia की मजबूत चाल
बुधवार को Jubilant Ingrevia के शेयरों ने निवेशकों को मालामाल कर दिया। कंपनी के शेयर 10% से अधिक चढ़ गए, और ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिन के औसत को कहीं पीछे छोड़ गया। यह मजबूती तब आई जब शेयर बाजार में गिरावट का माहौल था, जिसने Jubilant Ingrevia की अपनी अलग ताकत को दिखाया।
इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ा
इस जोरदार रैली के पीछे मुख्य वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का बढ़ा हुआ भरोसा रहा। FIIs ने अपनी हिस्सेदारी 6.15% से बढ़ाकर 6.49% कर ली है। वहीं, DIIs की हिस्सेदारी भी 24.00% से बढ़कर 24.76% हो गई है, जो मार्च 2026 तिमाही के आंकड़े हैं। इस खरीदारी ने स्टॉक को काफी मजबूती दी है।
वैल्यूएशन और प्रदर्शन: एक मिली-जुली तस्वीर
Jubilant Ingrevia भारतीय स्पेशियलिटी केमिकल्स सेक्टर में काम करती है, जो एक बड़ा ग्रोथ इंजन माना जाता है। हालांकि, कंपनी के वैल्यूएशन पर नजर डालें तो इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 39-42 के बीच है, जो सेक्टर के औसत 48.72 से कम है, लेकिन Aarti Industries (P/E 17.8) जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी ज्यादा है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) करीब 8.88% से 11.24% के बीच है, जो SRF (ROE 20.74%) जैसे साथियों से पीछे है। अच्छी बात यह है कि कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो लगभग 0.26-0.27 है, जो बताता है कि कर्ज का बोझ प्रबंधन योग्य है।
एनालिस्ट आशावादी, लेकिन जोखिम भी मौजूद
इन सब के बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट Jubilant Ingrevia को लेकर आशावादी हैं। 6 एनालिस्ट ने इसे 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग दी है और उनका औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट ₹919.50 है, जो वर्तमान भाव से 39% से अधिक की तेजी का संकेत देता है। यह भरोसा कंपनी के पाइरीडीन और विटामिन B3 में नेतृत्व, और हायर-मार्जिन स्पेशियलिटी केमिकल्स व CDMO सेवाओं की ओर रणनीतिक बदलाव से आया है। Axis Securities ने भी 'बाय' रेटिंग और ₹800 का टारगेट दिया है। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच साल में 18-20% EBITDA मार्जिन हासिल करना है।
चिंताएं और चुनौतियां
हालांकि, कुछ गंभीर चिंताएं भी हैं। Jubilant Ingrevia ने Q3 FY25-26 में नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में साल-दर-साल 21.9% की भारी गिरावट दर्ज की। पिछले पांच सालों में नेट सेल्स में -0.45% की सालाना दर से गिरावट आई है और ऑपरेटिंग प्रॉफिट -13.67% सिकुड़ गया है। केमिकल इंटरमीडिएट्स सेगमेंट में EBITDA मार्जिन गिरकर 4% रह गया है। मध्य पूर्व संघर्ष और लाल सागर संकट जैसी भू-राजनीतिक समस्याएं लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ा सकती हैं, और ऊर्जा की अस्थिर कीमतें फीडस्टॉक और बिजली के खर्चों को बढ़ा सकती हैं। इन सबके चलते MarketsMojo ने 'सावधानी से बेचें' की सिफारिश जारी की है। बावजूद इसके, चेयरमैन श्याम एस. भटिया को आरोपों से बरी कर दिया गया है। इन वैश्विक अनिश्चितताओं और आंतरिक प्रदर्शन की चुनौतियों के बीच, निवेशकों को कंपनी के परिचालन और वित्तीय लचीलेपन पर सावधानीपूर्वक विचार करना होगा।
