देश में बैटरी प्रोडक्शन को बढ़ावा
भारत सरकार की इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और मजबूत डोमेस्टिक EV बैटरी इकोसिस्टम बनाने की कोशिशें इस सेक्टर के लिए बड़ी वजह बन रही हैं। अनुमान है कि साल 2032 तक भारत में EV बैटरी की डिमांड 10 गुना बढ़कर 20 GWh (2025 में) से 200 GWh तक पहुंच जाएगी। EV को तेजी से अपनाए जाने के कारण यह डिमांड बढ़ रही है, जिसके तहत FY2025-26 में कुल व्हीकल रजिस्ट्रेशन का लगभग 8.5% हिस्सा EV का रहा, और 2.5 मिलियन से ज्यादा यूनिट्स बेची गईं। ऑटो और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (PLI) स्कीम्स और PM E-DRIVE जैसे सरकारी कदम लोकल प्रोडक्शन कैपेसिटी को मजबूत करने और निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखते हैं।
प्रमुख कंपनियाँ बाजार में हिस्सा लेने को तैयार
PCBL Chemical, Himadri Speciality Chemical और Balaji Amines जैसी कंपनियाँ इस तेजी से फैलते वैल्यू चेन में खुद को तैयार कर रही हैं। ये रॉ मैटेरियल और कंपोनेंट्स से लेकर फिनिश्ड बैटरी मैटेरियल्स तक में अपनी जगह बना रही हैं। PCBL Chemical अपने Nanovace प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अगली पीढ़ी के बैटरी मैटेरियल्स, जैसे नैनोसिलिकॉन, कंडक्टिव कार्बन और एसिटिलीन ब्लैक के लिए कर रही है। इसके कमर्शियल वॉल्यूम FY28 तक आने की उम्मीद है। FY26, जिसमें कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट में गिरावट देखी गई, चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन PCBL इस हाई-मार्जिन सेगमेंट में कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर जोर दे रही है। Himadri Speciality Chemical अपने एनोड मैटेरियल फैसिलिटी को चालू करके और चीन के बाहर दुनिया का पहला कमर्शियल-स्केल LFP कैथोड एक्टिव मटेरियल प्लांट स्थापित करके आक्रामक तरीके से अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है, जिसका लॉन्ग-टर्म लक्ष्य 200,000 MTPA है। कंपनी के स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट में एडवांस्ड एनोड और सेल टेक्नोलॉजी भी शामिल हैं। Balaji Amines भारत की एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड डाइमिथाइल कार्बोनेट (DMC) निर्माता है, जो एक महत्वपूर्ण बैटरी केमिकल है, और यह EV बैटरी के लिए अन्य जरूरी कंपोनेंट्स की कैपेसिटी भी बढ़ा रही है।
रिस्क और वैल्यूएशन की चिंताएँ
वैल्यूएशन एक बड़ी चिंता का विषय है। PCBL Chemical का पिछले बारह महीने (TTM) का P/E रेश्यो लगभग 54.60 है, जो स्पेशियलिटी केमिकल्स सेक्टर के औसत 37.87 से काफी ज्यादा है। Himadri Speciality Chemical का प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो भी लगभग 6.39 है, जो सेक्टर के औसत 3.37 की तुलना में स्ट्रेच्ड (stretched) लगता है। हालांकि, Himadri मजबूत रिटर्न रेश्यो जैसे ROE 16.84% और कम डेट-इक्विटी रेश्यो 0.05 दिखाती है, वहीं PCBL का ROCE 13.26% और ROE 12.85% उतने प्रभावशाली नहीं हैं। Balaji Amines, जिसका P/E रेश्यो करीब 34.23 है, पिछले पांच सालों में 1.72% की कमजोर सेल्स ग्रोथ का सामना कर रही है। PCBL और Himadri के लिए नए बैटरी मैटेरियल्स का कमर्शियलाइजेशन अपने आप में टेक्नोलॉजिकल और स्केलिंग रिस्क लेकर आता है, जिसके लिए भारी निवेश की जरूरत है। भारत की लिथियम और कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स के इंपोर्ट पर निर्भरता एक बड़ी कमजोरी बनी हुई है, भले ही डोमेस्टिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही हो। एनालिस्ट्स का सेंटिमेंट भी सतर्कता दर्शा रहा है, PCBL को 'न्यूट्रल' और Himadri को 'होल्ड' रेटिंग दी गई है। Himadri के टारगेट प्राइस में थोड़ी गिरावट की संभावना दिख रही है।
आगे की राह
भारत के EV बैटरी सेक्टर के लिए लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का रास्ता मजबूत है, जिसमें 2032 तक 200 GWh की डिमांड का अनुमान है। सरकारी पॉलिसियाँ लोकलाइजेशन और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करना जारी रखेंगी। हालांकि, इनकी सफलता महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं को एग्जीक्यूट करने, बड़े निवेश की जरूरतों को मैनेज करने और ग्लोबल कंप्टीशन से निपटने पर निर्भर करेगी। जबकि बाजार महत्वपूर्ण वैल्यू क्रिएशन की उम्मीद कर रहा है, आगे का रास्ता एग्जीक्यूशन रिस्क और संभावित वैल्यूएशन करेक्शंस से भरा है, जिसके लिए निवेशकों को सावधानी से समीक्षा करने की आवश्यकता है।