केमिकल सेक्टर को मिला बड़ा बूस्ट
सरकार ने केमिकल सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी चाल चली है। बजट 2026 में इस सेक्टर के लिए खास योजनाएं पेश की गई हैं, जिनसे आने वाले समय में भारत की केमिकल इंडस्ट्री को भारी मजबूती मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2026 में यह सेक्टर 10.9% की दर से बढ़ेगा, और इन नई पहलों से इस ग्रोथ को और भी तेजी मिलेगी।
तीन नए केमिकल पार्क बनेंगे
सरकार देश भर में तीन नए डेडिकेटेड केमिकल पार्क स्थापित करेगी। इन पार्कों के लिए बजट में ₹600 करोड़ का एलोकेशन किया गया है। ये पार्क एक 'क्लस्टर-बेस्ड, प्लग-एंड-प्ले मॉडल' पर काम करेंगे, जिससे इंडस्ट्रीज के लिए ऑपरेशन्स को स्ट्रीमलाइन करना और प्रोडक्शन बढ़ाना आसान हो जाएगा। इस कदम से 'मेक इन इंडिया' को भी बड़ा बल मिलेगा और देश आत्मनिर्भर बनेगा।
कार्बन कैप्चर पर बड़ा निवेश
सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर बढ़ते हुए, सरकार ने कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) टेक्नोलॉजीज के लिए अगले पांच सालों में ₹20,000 करोड़ का बड़ा फंड आवंटित किया है। बजट 2026-27 के लिए शुरुआती एलोकेशन ₹500 करोड़ रखा गया है। यह फंड केमिकल, पावर, स्टील, सीमेंट और रिफाइनरी जैसे सेक्टर्स में CCUS को अपनाने में मदद करेगा, जिससे भारत अपने नेट-जीरो एम्बिशन्स को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। CCUS रोडमैप 2025 में लॉन्च किया गया था, जिसका मकसद टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाना और पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू करना है।
कस्टम्स ड्यूटी में हुए अहम बदलाव
घरेलू प्रोड्यूसर्स को बचाने और ट्रेड की निगरानी के लिए, बजट में कस्टम्स ड्यूटी से जुड़े कई बड़े बदलाव किए गए हैं। 2 फरवरी, 2026 से पोटेशियम हाइड्रोक्साइड पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) को Nil से बढ़ाकर 7.5% कर दिया गया है। वहीं, फर्टिलाइजर मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले नैफ्था पर कस्टम्स ड्यूटी छूट 1 अप्रैल, 2026 से खत्म हो जाएगी, और अल्फा पाइनिन पर यह छूट 2 फरवरी, 2026 से खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, 148 नए टैरिफ लाइन्स को कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 में शामिल किया जाएगा, जिससे रेट्स को सरल बनाने और खास केमिकल्स की मॉनिटरिंग में मदद मिलेगी। सरकार इंपोर्ट पर लगी छूट की भी समीक्षा कर रही है ताकि 'मेक इन इंडिया' को सपोर्ट मिल सके।
क्रिटिकल मिनरल्स और कोऑपरेटिव्स को सपोर्ट
सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स की घरेलू प्रोसेसिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर BCD छूट दी है। साथ ही, सोलर ग्लास मैन्युफैक्चरिंग के लिए सोडियम एंटीमोनेट पर भी यह छूट जारी रहेगी। यह कदम इंडिया के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन और प्रोसेसिंग को बढ़ाना है। इसके अलावा, प्राइमरी कोऑपरेटिव सोसाइटीज को कॉटन सीड और कैटल फीड पर टैक्स बेनिफिट्स का विस्तार किया गया है, जो इनडायरेक्टली केमिकल इंडस्ट्री से जुड़े सेक्टर्स को सपोर्ट करेगा।
सेक्टर का भविष्य और चुनौतियां
भारतीय केमिकल इंडस्ट्री में मजबूत ग्रोथ का अनुमान है, जो डोमेस्टिक डिमांड और सरकारी सपोर्ट से प्रेरित है। हालांकि, सेक्टर अभी भी ग्लोबल ओवरसप्लाई, डिमांड वोलेटिलिटी और बढ़ती एनर्जी कॉस्ट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। बजट में किए गए ये ऐलान, जैसे डेडिकेटेड पार्क्स और टैरिफ एडजस्टमेंट, सेक्टर की कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाने और इंपोर्ट डिपेंडेंसी को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।