भारत सरकार ने केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर को साल 2040 तक **$1 ट्रिलियन** का बनाने का बड़ा रोडमैप तैयार किया है। इस योजना के तहत नए केमिकल पार्क और रिसर्च पर जोर दिया जाएगा, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
भारत सरकार ने केमिकल और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री को एक बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी कर ली है। फिलहाल यह सेक्टर $220 से $250 बिलियन के बीच है और देश की जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 7% है। सरकार का लक्ष्य इसे $1 ट्रिलियन तक पहुंचाकर भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है।
BHAVYA-Rasayan स्कीम का दम
इस मिशन को पूरा करने के लिए सरकार BHAVYA-Rasayan Scheme लेकर आई है, जिसके लिए 2026 से 2031 के बीच ₹3,030 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसमें 3 बड़े केमिकल पार्क बनाए जाएंगे, जहां कंपनियों को 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे सेटअप का खर्चा कम होगा और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर फोकस
सरकार अब बेसिक केमिकल्स से हटकर 'स्पेशलिटी केमिकल्स' (Specialty Chemicals) पर जोर दे रही है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और फार्मा सेक्टर में होता है, जहां मुनाफा मार्जिन काफी बेहतर मिलता है। रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश बढ़ाकर सरकार आयात पर निर्भरता को कम करना चाहती है। साथ ही, इसे सेमीकंडक्टर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग जैसे मिशनों के साथ जोड़ा जा रहा है ताकि घरेलू स्तर पर डिमांड बनी रहे।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
हालांकि लक्ष्य बड़ा है, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। कच्चा माल (Feedstock) के लिए अभी भी विदेशों पर निर्भरता है, जिसके कारण ग्लोबल मार्केट में कीमतों के बदलाव का असर मार्जिन पर पड़ता है। इसके अलावा, चीन से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा और सख्त पर्यावरण नियमों के पालन का दबाव छोटे और मध्यम कंपनियों के कैश फ्लो पर असर डाल सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में सरकारी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार और कंपनियों की रिसर्च क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
