भारत के पेट्रोकेमिकल सेक्टर में पिछले 12 सालों में **₹3.4 लाख करोड़** का भारी निवेश आया है, जिससे **3.7 लाख** नई नौकरियां पैदा हुई हैं। इस ग्रोथ को और तेज करने के लिए सरकार 'BHAVYA Rasayan' स्कीम लेकर आई है, जिस पर **₹3,030 करोड़** खर्च होंगे। अब देखना यह है कि यह नया 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल, ग्लोबल कंपनियों से कड़ी टक्कर झेल रही केमिकल कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्जिन पर कितना असर डालता है।
पेट्रोकेमिकल सेक्टर में ₹3.4 लाख करोड़ का निवेश
भारत के पेट्रोकेमिकल सेक्टर ने पिछले 12 सालों में ₹3.4 लाख करोड़ का शानदार निवेश आकर्षित किया है। इस पैसे से 2,200 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगीं और 3.7 लाख नौकरियां सृजित हुईं। दहेज, विशाखापत्तनम-काकीनाडा और पारादीप जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में सरकारी प्रयासों से इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेष औद्योगिक जोन के विकास पर जोर दिया गया है।
केमिकल पार्कों के लिए नई सरकारी स्कीम
ग्रोथ को और रफ्तार देने के लिए, केंद्रीय कैबिनेट ने ₹3,030 करोड़ के आउटले वाली 'BHAVYA Rasayan' स्कीम को मंजूरी दी है। इस पहल के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच तीन नए केमिकल पार्क विकसित किए जाएंगे। यह स्कीम क्लस्टर-आधारित, 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल पर काम करेगी, जिसका मकसद कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने में लगने वाले समय और शुरुआती लागत को कम करना है। रेडी-टू-यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफर करके, सरकार घरेलू केमिकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए एंट्री बैरियर्स को कम करना चाहती है और उनकी कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाना चाहती है।
सेक्टर के सामने चुनौतियां और जोखिम
इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार एक पॉजिटिव कदम है, लेकिन सेक्टर को कई स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। निवेशक अक्सर ग्लोबल सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों पर नजर रखते हैं, खासकर पश्चिम एशिया में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव, जिसका सीधा असर भारतीय केमिकल कंपनियों की फीडस्टॉक लागत पर पड़ता है। इसके अलावा, खासकर चीन से बढ़ती प्रोडक्शन कैपेसिटी के कारण ग्लोबल ओवरसप्लाई की स्थिति बनी हुई है। यह ओवरकैपेसिटी डोमेस्टिक प्लेयर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डालती है, क्योंकि उन्हें कम कीमत वाले इम्पोर्टेड प्रोडक्ट्स से मुकाबला करना पड़ता है।
साथ ही, कंपनियां कार्बन एमिशन और सस्टेनेबिलिटी को लेकर सख्त रेगुलेटरी आवश्यकताओं का भी सामना कर रही हैं। ग्रीनर, ज्यादा एफिशिएंट केमिकल प्रोसेसेज में ट्रांजिशन के लिए बड़े कैपिटल खर्च की जरूरत होती है, जो कि कैश फ्लो और रिटर्न रेश्यो को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि डोमेस्टिक फर्म्स इन नई इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके लागत को कितनी प्रभावी ढंग से ऑफसेट कर पाती हैं और क्या नए केमिकल पार्क हाई-कॉस्ट इम्पोर्टेड मैटेरियल्स पर वर्तमान निर्भरता को कम करने में मदद कर पाते हैं।
