चीन से आने वाले इनसोल्युबल सल्फर (Insoluble Sulphur) पर सरकारी शिकंजा कस गया है। Directorate General of Trade Remedies (DGTR) ने Oriental Carbon and Chemicals Ltd (OCCL) की शिकायत के बाद इस पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) की जांच शुरू कर दी है।
सब्सिडी का आरोप और जांच का आधार
DGTR ने केस नंबर CVD/OI/008/2026 के तहत यह जांच शुरू की है। देश में इस खास केमिकल की इकलौती निर्माता कंपनी OCCL ने आरोप लगाया है कि चीनी कंपनियां 79 तरह की सरकारी सब्सिडी का फायदा उठा रही हैं। इनमें सस्ती बिजली, रियायती जमीन और टैक्स में छूट शामिल है, जिसके चलते चीनी कंपनियां बहुत सस्ते दामों पर माल भारत भेज रही हैं।
टायरों की लागत पर असर
यह जांच इसलिए भी अहम है क्योंकि इनसोल्युबल सल्फर का 90% से ज्यादा उपयोग टायर इंडस्ट्री में होता है। सरकार पहले भी सख्त रुख अपना चुकी है। सितंबर 2026 में सरकार ने चीन से आने वाले सल्फर पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी को $307 प्रति टन से बढ़ाकर $485 प्रति टन करने की सिफारिश की थी।
कंपनी की स्थिति और रिस्क
OCCL का घरेलू मार्केट में 55% से 60% तक का कब्जा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर के अंत तक कंपनी पर कर्ज का बोझ भी काफी कम यानी सिर्फ ₹19 करोड़ था। हालांकि, कंपनी के मुनाफे पर ग्लोबल सल्फर कीमतों का सीधा असर पड़ता है, जिन्हें कंट्रोल करना मुश्किल होता है। अब मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि DGTR अपनी शुरुआती फाइंडिंग्स में क्या फैसला लेती है और क्या इस दौरान कोई अस्थायी ड्यूटी (Temporary Duty) लगाई जाती है।
