📉 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
India Glycols Limited ने Q3 FY26 में दमदार नतीजे पेश किए हैं, जो साल-दर-साल (YoY) शानदार सुधार दिखाते हैं। स्टैंडअलोन बेस पर, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 21.04% बढ़कर ₹65.07 करोड़ हो गया। यह उछाल 5.25% बढ़कर ₹2,551.06 करोड़ के रेवेन्यू (Revenue) से संभव हुआ।
कंसोलिडेटेड (Consolidated) प्रदर्शन भी उतना ही प्रभावशाली रहा। PAT में 19.00% की साल-दर-साल बढ़ोतरी के साथ यह ₹67.57 करोड़ पर पहुंच गया। सबसे खास बात यह रही कि कंसोलिडेटेड EBITDA में 36.09% की जोरदार उछाल देखी गई, जो ₹176.21 करोड़ रहा। इसके चलते मार्जिन (Margin) में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ, जो Q3 FY25 के 5.34% से बढ़कर Q3 FY26 में 6.91% हो गया।
पहले नौ महीनों (Nine-month period) की बात करें तो, स्टैंडअलोन PAT 31.89% बढ़कर ₹171.49 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि रेवेन्यू 9.00% बढ़कर ₹7,464.80 करोड़ रहा। इसी तरह, कंसोलिडेटेड PAT 23.35% बढ़कर ₹205.88 करोड़ दर्ज किया गया।
कंपनी ने नए लेबर कोड लागू होने के कारण अतिरिक्त कर्मचारी लाभ व्यय से संबंधित ₹0.83 करोड़ का एक एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional item) भी रिपोर्ट किया है, जो तिमाही और नौ महीने की अवधि दोनों के लिए है।
🚀 कंपनी की बड़ी चालें और भविष्य की योजना
India Glycols कॉर्पोरेट पुनर्गठन की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। बोर्ड ने एक संशोधित स्कीम ऑफ अरेंजमेंट (Scheme of Arrangement) को मंजूरी दी है, जो विशेष रूप से बायो फार्मा (Bio Pharma) और स्पिरिट्स एंड बायोफ्यूल (Spirits & Biofuel) अंडरटेकिंग्स के डीमर्जर (Demerger) पर केंद्रित है। इसकी अप्वॉइंटेड डेट (Appointed date) 1 अप्रैल, 2026 तय की गई है। इस रणनीतिक बदलाव का मकसद विभिन्न व्यावसायिक वर्टिकल्स को अलग करके वैल्यू अनलॉक करना है।
वित्तीय मोर्चे पर, कंपनी ने ₹915 प्रति शेयर की दर से ₹467 करोड़ का प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential allotment) सफलतापूर्वक पूरा करके अपनी पूंजी को मजबूत किया है। इसके अलावा, 10:5 का स्टॉक स्प्लिट (Stock split) भी लागू किया गया है, जिसने पिछले अवधियों के EPS (Earnings Per Share) को प्रभावित किया है।
🚩 भविष्य की राह और अनिश्चितताएँ
कंपनी के मैनेजमेंट ने भविष्य के प्रदर्शन को लेकर कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking guidance) जारी नहीं किया है, जिससे भविष्य की अनुमानों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को डीमर्जर योजना के क्रियान्वयन पर बारीकी से नजर रखनी होगी, जिसमें एकीकरण (Integration) और नियामक (Regulatory) जोखिम जुड़े हुए हैं। Q3 में बायो-फ्यूल सेगमेंट का मजबूत प्रदर्शन एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अन्य सेगमेंट के मिले-जुले प्रदर्शन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। वहीं, सफल पूंजी जुटाने से कंपनी को भविष्य की विकास पहलों के लिए वित्तीय लचीलापन मिलेगा।
