India Glycols Demerger: बड़े बदलाव की तैयारी, पर कानूनी झंझटों का डर!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Glycols Demerger: बड़े बदलाव की तैयारी, पर कानूनी झंझटों का डर!
Overview

India Glycols Limited (इंडिया ग्लाइकोल्स) ने अपने कारोबार के डीमर्जर (Demerger) की बड़ी योजना को आगे बढ़ाया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कंपनी के Bio Pharma और Spirits अंडरटेकिंग्स को दो अलग कंपनियों - Ennature Bio Pharma Limited और IGL Spirits Limited - में बांटने की स्कीम को मंजूरी दे दी है।

India Glycols Limited (इंडिया ग्लाइकोल्स) ने अपने कारोबार को दो अलग-अलग पब्लिकली ट्रेडेड एंटिटीज में बांटने की एक बड़ी कॉर्पोरेट ट्रांसफॉर्मेशन योजना बनाई है। कंपनी अपनी Bio Pharma यूनिट को Ennature Bio Pharma Limited और अपनी Spirits (शराब) और Biofuel (बायोफ्यूल) यूनिट को IGL Spirits Limited नाम की कंपनियों में डीमर्ज करेगी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इस स्कीम को हरी झंडी दे दी है, और डीमर्जर के लिए 1 अप्रैल, 2026 की तय तारीख (appointed date) तय की गई है। इस स्कीम को अंतिम मंजूरी देने के लिए 24 मार्च, 2026 को अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स (Unsecured Creditors) की एक अहम बैठक बुलाई गई है।

इस डीमर्जर के पीछे कंपनी का मकसद हर बिजनेस वर्टिकल को स्वतंत्र ग्रोथ पोटेंशियल देना और शेयरहोल्डर वैल्यू (Shareholder Value) बढ़ाना है। Ennature Bio Pharma बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) सेक्टर पर फोकस करेगी, जबकि IGL Spirits शराब और बायोफ्यूल ऑपरेशंस संभालेगी। इस कदम से हर सेगमेंट को उसकी अपनी जरूरत के हिसाब से मैनेजमेंट और कैपिटल एलोकेशन मिल पाएगा।

कंपनी के मैनेजमेंट ने हाल ही में कॉस्ट कटिंग (cost cutting) पर जोर दिया है, जिसका असर नतीजों में दिखा है। Q3 FY26 में, India Glycols ने रेवेन्यू (Revenue) में करीब 5.25% की ग्रोथ दर्ज की है और नेट प्रॉफिट (Net Profit) में भी इजाफा देखा गया है। Bio-Fuel और Bio-based Specialty सेगमेंट मजबूत रहे हैं, हालांकि Ennature Biopharma सेगमेंट में फीडस्टॉक कॉस्ट (feedstock costs) और मार्केट वोलेटिलिटी (market volatility) के कारण Q3 FY26 में रेवेन्यू में कमी आई थी। इन सबके बावजूद, कंपनी ने बड़े लोन अमाउंट की प्री-पेमेंट (prepayment) करके और इंटरेस्ट कॉस्ट (interest costs) को मैनेज करके डेट रिडक्शन (debt reduction) पर लगातार फोकस किया है।

हालांकि, यह बड़ा कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (corporate restructuring) ऐसे समय में हो रहा है जब India Glycols कई कानूनी और टैक्स संबंधी विवादों (legal and tax proceedings) से जूझ रही है, जो निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा कर सकते हैं।

कंपनी कई तरह के मामलों में फंसी हुई है:

  • सिविल मामले (Civil Matters): सिंगापुर हाई कोर्ट, मुंबई सिटी सिविल कोर्ट, APTEL और अन्य अदालतों में कंपनी के खिलाफ कई सिविल केस चल रहे हैं। इनमें M/s Tex Minerals and Chemicals LLC की याचिकाएं और एक आर्बिट्रेशन अवार्ड (arbitration award) के खिलाफ अपील भी शामिल है, जिसकी सुनवाई 24 अप्रैल, 2026 को होनी है।

  • टैक्स संबंधी मामले (Tax Related Matters): कंपनी CSR एक्सपेंस (expenses) के डिसअलॉउमेंट (disallowance) और सेक्शन 35(2AB) के तहत क्लेम्स से जुड़े टैक्स मामलों को चुनौती दे रही है। इसके अलावा, ड्यूटी ड्रॉबैक (duty drawback) और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (dividend distribution tax) चालान के गैर-विचारण (non-consideration) से जुड़े मुद्दे भी चल रहे हैं।

  • इनडायरेक्ट टैक्स मामले (Indirect Tax Matters): कंपनी एक्साइज ड्यूटी (excise duty) डिमांड्स और पेनल्टी (penalty) से संबंधित कार्यवाही में शामिल है, खासकर डेनेचर्ड एथिल अल्कोहल (Denatured Ethyl Alcohol - DEA) के संबंध में।

  • कस्टम ड्यूटी विवाद (Customs Duty Dispute): दिसंबर 2025 में, India Glycols की Ennature Bio-Pharma डिविजन को आयात (imports) के संबंध में लगभग ₹32.95 लाख की कस्टम ड्यूटी और उतनी ही पेनल्टी का आदेश मिला था। कंपनी इस आदेश के खिलाफ अपील करने की योजना बना रही है।

  • टैक्स अपील के नतीजे (Tax Appeal Outcome): दिसंबर 2025 में, कंपनी को इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) से ₹5.06 करोड़ के टैक्स डिमांड के मामले में एक अनुकूल आदेश मिला, जो कंपनी के पक्ष में रहा।

  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit): इसी तरह, दिसंबर 2025 में ₹1.92 करोड़ के ट्रांजिशनल इनपुट टैक्स क्रेडिट (Transitional Input Tax Credit) से जुड़े एक पुराने डिमांड ऑर्डर को भी सेट-असाइड (set aside) कर दिया गया, जो कंपनी के लिए राहत भरा रहा।
इन सभी कानूनी और टैक्स विवादों का समाधान कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और निवेशकों के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण होगा। कंपनी की क्रेडिट रेटिंग (credit rating) भी इन विवादों के चलते वॉच (under watch) पर बताई जा रही है। निवेशकों को इन सभी मामलों के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कोई भी प्रतिकूल फैसला वित्तीय बोझ बढ़ा सकता है।

India Glycols केमिकल, स्पिरिट्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे विविध क्षेत्रों में काम करती है। इसके केमिकल सेगमेंट में Tata Chemicals, Deepak Nitrite जैसी कंपनियां प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि बायोटेक और स्पिरिट्स सेगमेंट में भी कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं। हालिया स्टॉक रिटर्न (stock returns) के मामले में कंपनी ने अपने कुछ साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन डीमर्ज की गई कंपनियों का प्रदर्शन उनके विशिष्ट इंडस्ट्री बेंचमार्क के खिलाफ देखा जाना चाहिए।

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