भारत अपने केमिकल इंडस्ट्री को बड़ा विस्तार देने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य 2040 तक इसे **$1 ट्रिलियन** तक पहुंचाना है, जिसके लिए **₹3,030 करोड़** के 'BHAVYA Rasayan' स्कीम का ऐलान किया गया है।
ग्लोबल केमिकल मार्केट में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मल्टीनेशनल कंपनियां अब अपनी सप्लाई चेन को चीन से हटाकर भारत की ओर शिफ्ट कर रही हैं, जिसे 'China-plus-one' स्ट्रेटेजी कहा जा रहा है। फिलहाल भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा केमिकल प्रोड्यूसर है, लेकिन वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी अभी भी $250 बिलियन के आसपास ही है, जो आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं दिखाता है।
हाई-वैल्यू प्रोडक्शन पर जोर
इंडस्ट्री का विजन सिर्फ प्रोडक्शन बढ़ाना नहीं, बल्कि बेसिक कमोडिटी केमिकल्स से हटकर स्पेशलिटी केमिकल्स की ओर शिफ्ट होना है। इसमें डाई, पिगमेंट और फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं, जिनका मार्जिन काफी बेहतर होता है। भारत अपनी तकनीकी दक्षता के दम पर अब इनोवेशन और क्वालिटी के आधार पर मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है।
सरकार ने इसके लिए 'BHAVYA Rasayan' स्कीम शुरू की है, जिसमें ₹3,030 करोड़ का आउटले रखा गया है। इसके जरिए बड़े केमिकल पार्क विकसित किए जाएंगे, ताकि ट्रांसपोर्टेशन लागत कम हो और सप्लाई चेन को एकीकृत (Integrate) किया जा सके।
निवेशकों के लिए जरूरी सावधानी
उत्साह के बीच, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए। भारत अभी भी कच्चे माल यानी फीडस्टॉक के आयात पर निर्भर है, जो वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के समय मुनाफे (Margins) पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, नई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का समय पर पूरा होना और आरएंडडी (R&D) में निवेश की गति भी सेक्टर की सफलता तय करेगी। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो हाई-वैल्यू सेगमेंट में अपनी जगह पक्की कर रही हैं।
