Haldia Petrochemicals ने अपनी सब्सिडियरी Adperma के जरिए भारत का सबसे बड़ा फिनोल और एसीटोन प्लांट शुरू किया है। **₹6,000 करोड़** के इस निवेश से केमिकल इंपोर्ट में भारी कमी आने की उम्मीद है।
क्षमता विस्तार और आत्मनिर्भरता
पश्चिम बंगाल के हल्दिया में स्थित यह नई यूनिट 345,000 टन फिनोल और 215,000 टन एसीटोन का वार्षिक उत्पादन करेगी। यह भारत का अपनी तरह का सबसे बड़ा प्लांट है। इस कदम का मुख्य मकसद केमिकल सेक्टर में विदेशों पर निर्भरता को कम करना है, क्योंकि अभी तक फार्मा, प्लास्टिक और लैमिनेट इंडस्ट्री को अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर इंपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था। यह प्लांट कंपनी के मौजूदा पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के साथ जुड़ा हुआ है, जो प्रोपलीन और बेंजीन की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा।
फाइनेंशियल सेहत और कर्ज का गणित
Haldia Petrochemicals फिलहाल एक अनलिस्टेड कंपनी है, लेकिन इसके डेट सिक्योरिटीज (Debt Securities) बाजार में लिस्टेड हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने कंपनी के डेट इंस्ट्रूमेंट्स को 'IND A+/IND A1' रेटिंग के साथ 'स्टेबल' आउटलुक दिया है। हालांकि कंपनी ने HPL Technologies B.V. में हिस्सेदारी बेचकर और नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स का समय से पहले भुगतान करके अपना कर्ज कम करने की कोशिश की है, लेकिन इतने बड़े प्रोजेक्ट पर खर्च के बाद निवेशकों की नजर कंपनी के कर्ज प्रबंधन (Debt Management) पर बनी रहेगी।
सेक्टर के सामने चुनौतियां
पेट्रोकेमिकल सेक्टर अपने स्वभाव से ही काफी उतार-चढ़ाव वाला है। कंपनी का मुनाफा ग्लोबल डिमांड, रॉ मटेरियल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर निर्भर करता है। इसके अलावा, इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का सीधा असर कंपनी की कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग पर पड़ सकता है। अब बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि कंपनी का यह नया प्लांट कितनी तेजी से प्रोडक्शन रैम-अप करता है और क्या यह कर्ज चुकाने के लिए जरूरी कैश फ्लो जेनरेट कर पाएगा।
