Haldia Petrochemicals ने अपनी सब्सिडियरी AdPerma के जरिए एक नए फिनोल-एसीटोन प्लांट की घोषणा की है। इस **₹6,000 करोड़** के प्रोजेक्ट का लक्ष्य भारत की इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करना है, जिसका काम **2027** की शुरुआत तक पूरा होने की उम्मीद है।
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बड़ा विस्तार
कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी, AdPerma के माध्यम से इस प्रोजेक्ट की कमान संभाली है। इस प्लांट से हर साल 345,000 टन फिनोल और 215,000 टन एसीटोन का उत्पादन किया जाएगा। यह कदम कंपनी के लिए हाई-वैल्यू डाउनस्ट्रीम केमिकल प्रोडक्शन की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
क्यों है यह प्रोजेक्ट खास?
भारत में फिनोल-एसीटोन की सालाना मांग लगभग 700,000 टन है, लेकिन घरेलू उत्पादन कुल मांग का आधा भी पूरा नहीं कर पाता। इस नई यूनिट के साथ कंपनी चीन, मिडिल ईस्ट और साउथ-ईस्ट एशिया से होने वाले आयात को चुनौती देने की तैयारी में है।
सबसे बड़ा फायदा कंपनी के पास मौजूद 1,120 एकड़ के हल्दिया कॉम्प्लेक्स का है। AdPerma सीधे तौर पर कंपनी के मौजूदा बेंजीन (benzene) और प्रोपलीन (propylene) इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर पाएगी। वर्टिकल इंटीग्रेशन (Vertical integration) की इस रणनीति से प्रोडक्शन कॉस्ट पर बेहतर नियंत्रण रखना आसान होगा।
भविष्य की राह और रिस्क
मैनेजमेंट की नजर अब स्पेशलिटी केमिकल्स सेक्टर पर है। यह प्लांट आगे चलकर बिस्फेनॉल-ए (bisphenol-A) और पॉलीकार्बोनेट (polycarbonates) जैसे जटिल केमिकल्स के उत्पादन के लिए बेस तैयार करेगा। हालांकि, मार्केट जानकारों का मानना है कि केमिकल सेक्टर में इस तरह के बड़े कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स में एग्जीक्यूशन रिस्क और लागत बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। निवेशकों को कंपनी की समय सीमा और बजट पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
