HOCL Share Price: रेवेन्यू में उछाल, पर घाटा गहराया! जानें वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
HOCL Share Price: रेवेन्यू में उछाल, पर घाटा गहराया! जानें वजह
Overview

Hindustan Organic Chemicals Limited (HOCL) ने Q3 FY26 के अपने नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में साल-दर-साल (YoY) **16.61%** की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, बड़े 'एक्सेप्शनल आइटम्स' (Exceptional Items) के कारण कंपनी को **₹3,952.11 लाख** का भारी स्टैंडअलोन नेट लॉस (Net Loss) हुआ है, जो पिछले साल की इसी अवधि के प्रॉफिट के मुकाबले बड़ी गिरावट है।

नतीजों का पूरा लेखा-जोखा

HOCL ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए अपने ऑपरेशन से ₹14,724.32 लाख का स्टैंडअलोन रेवेन्यू रिपोर्ट किया है। यह पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) के ₹12,626.75 लाख से 16.61% ज्यादा है। वहीं, नौ महीनों (9M FY26) के लिए स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹45,332.59 लाख रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 8.78% बढ़ा है।

लेकिन, कंपनी की बॉटम लाइन (Bottom Line) की तस्वीर कुछ और ही बयां करती है। HOCL को Q3 FY26 में ₹3,952.11 लाख का स्टैंडअलोन नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने ₹1,815.40 लाख का प्रॉफिट कमाया था। नौ महीनों (9M FY26) की अवधि में भी ₹7,876.69 लाख का बड़ा नेट लॉस दर्ज किया गया, जबकि 9M FY25 में यह लॉस ₹2,860.59 लाख था। कंसॉलिडेटेड (Consolidated) आंकड़े भी चिंताजनक रहे, जहां Q3 FY26 में टोटल कॉम्प्रिहेंसिव इनकम (Total Comprehensive Income) ₹(39,109.49) लाख रही, जो Q3 FY25 के ₹(12,794.85) लाख से काफी खराब है।

घाटे की वजह: 'एक्सेप्शनल आइटम्स' का भारी बोझ

अगर 'एक्सेप्शनल आइटम्स' को छोड़ दें, तो ऑपरेशनल परफॉरमेंस में सुधार दिखा है। 'एक्सेप्शनल आइटम्स' से पहले का प्रॉफिट/लॉस (Profit/Loss before Exceptional Items) Q3 FY26 में ₹651.31 लाख रहा, जो Q3 FY25 के ₹(365.43) लाख के लॉस के मुकाबले बेहतर है। लेकिन, बड़े राइट-ऑफ (Write-offs) ने फाइनेंशियल नतीजों को बुरी तरह प्रभावित किया।

Q3 FY26 में ₹7,876.69 लाख के प्रमुख 'एक्सेप्शनल आइटम्स' ने प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) पर भारी असर डाला, जो ₹(3,629.11) लाख रहा। इसमें एक कोर्ट के आदेश के तहत मेस्ने प्रॉफिट्स (Mesne Profits) की लायबिलिटी ₹4,306.91 लाख शामिल थी, जिसका कुछ हिस्सा ब्याज के रूप में 'एक्सेप्शनल आइटम' के तौर पर बुक किया गया।

एक और बड़ा फैक्टर रहा भारत सरकार द्वारा लंबे समय से चले आ रहे GOI लोंस और रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स (Redeemable Preference Shares) की वेवर (Waiver), जिसमें एक्यूमुलेटेड इंटरेस्ट (Accumulated Interest) भी शामिल था। प्रिंसिपल अमाउंट को इक्विटी में बदला गया, लेकिन जमा हुए इंटरेस्ट को 'एक्सेप्शनल आइटम' माना गया।

इसके अलावा, सब्सिडियरी (Subsidiary) Hindustan Fluorocarbons Ltd (HFL) अपने लोन इंटरेस्ट का भुगतान नहीं कर पाई, जिसके चलते HOCL को फ्यूचर इंटरेस्ट वेव करना पड़ा। इसके कारण HFL को अब 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) नहीं माना जा रहा है।

मैनेजमेंट की ओर से कोई कमेंट्री नहीं

जारी किए गए नतीजों के साथ मैनेजमेंट की ओर से कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking guidance) या कॉन कॉल (Concall) कमेंट्री शामिल नहीं थी। कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स 'गोइंग कंसर्न' बेसिस पर तैयार किए गए हैं, जिसमें ऑपरेशनल फिनोल प्लांट (Phenol plant) और जमीन की बिक्री जैसे रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) एफर्ट्स का सपोर्ट है। हालांकि, कंपनी ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (Independent Directors) की कंपोजीशन के संबंध में SEBI LODR रेगुलेशन्स (SEBI LODR Regulations) के नॉन-कंप्लायंस (Non-compliance) का भी उल्लेख किया।

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