Gujarat Fluorochemicals के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी देखी गई। कंपनी ने जून 2026 तिमाही के लिए **20%** ज्यादा नेट प्रॉफिट (Net Profit) का ऐलान किया, जिसके बाद शेयर **3.39%** चढ़कर **₹4,565.80** पर पहुंच गए। हालांकि, कंपनी के नए इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में शुरुआती घाटा अभी भी जारी है।
केमिकल बिजनेस की दमदार ग्रोथ
Gujarat Fluorochemicals Limited (GFL) के स्टॉक में आज, 12 अगस्त 2026 को, अच्छी बढ़त देखी गई और यह इंट्राडे में ₹4,695 के स्तर तक पहुंच गया। यह उछाल कंपनी द्वारा 30 जून 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के नतीजों के बाद आया है।
कंपनी ने ₹219 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 20% ज्यादा है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 24% बढ़कर ₹1,588 करोड़ हो गया। इस शानदार प्रदर्शन का मुख्य कारण कंपनी का पारंपरिक केमिकल बिजनेस रहा, जो लगातार मुनाफे का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है।
EV सेगमेंट में शुरुआती घाटा
कंपनी के केमिकल सेगमेंट का रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹1,574 करोड़ रहा और इस सेगमेंट से मुनाफा 33% बढ़कर ₹261 करोड़ हो गया। R32 रेफ्रिजरेंट्स (refrigerants) और फ्लोरोपॉलीमर (fluoropolymers) की बढ़ती मांग ने इन नंबर्स को सहारा दिया। ये प्रोडक्ट्स एयर कंडीशनिंग और कई अन्य इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस में इस्तेमाल होते हैं।
इसके विपरीत, कंपनी के नए इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) प्रोडक्ट्स सेगमेंट ने इस तिमाही में ₹42 करोड़ का घाटा दर्ज किया। कंपनी फिलहाल बैटरी मैटेरियल्स (battery materials) के लिए कैपेसिटी बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर भारी निवेश कर रही है। निवेशक इस सेगमेंट पर पैनी नजर रखे हुए हैं कि यह कब तक प्रॉफिटेबल (profitable) बनता है।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
Gujarat Fluorochemicals ने फाइनेंशियल ईयर 2028 के अंत तक ₹6,000 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) के साथ विस्तार की महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा बैटरी मैटेरियल्स और अन्य ग्रोथ प्रोजेक्ट्स के लिए रखा गया है। यह निवेश लंबे समय में कंपनी की ग्रोथ बढ़ा सकता है, लेकिन इसमें एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risk) भी शामिल है।
इसके अलावा, कंपनी ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता (volatility) के प्रति संवेदनशील है। फ्लोरोकेमिकल्स और फ्लोरोपॉलीमर की मांग ग्लोबल इकोनॉमिक साइकल्स (economic cycles) पर निर्भर करती है, जिसका असर कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ सकता है। कुछ एनालिस्ट्स (analysts) का यह भी मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन (valuation) कुछ हद तक ज्यादा है, यानी मार्केट पहले से ही हाई ग्रोथ की उम्मीदें लगा रहा है।
