Chemical Sector: चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी, सरकार लाएगी नए इंसेंटिव्स

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AuthorMehul Desai|Published at:
Chemical Sector: चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी, सरकार लाएगी नए इंसेंटिव्स

केमिकल सेक्टर के लिए सरकार एक नई पॉलिसी लाने जा रही है, जिसका मकसद अमेरिका पर अपनी **18%** की निर्भरता को घटाना और चीन से होने वाले **41.8%** ऑर्गेनिक केमिकल इंपोर्ट को कम करना है। इस मास्टर प्लान के तहत साल **2030** तक केमिकल एक्सपोर्ट को **$81 बिलियन** तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

बाजार का रुख बदलने की तैयारी

भारत अब अपने केमिकल सेक्टर की तस्वीर बदलने की तैयारी में है। अभी हमारे कुल केमिकल एक्सपोर्ट का 18% हिस्सा सिर्फ अमेरिका जाता है। सरकार इस एकाधिकार को कम करने के लिए अब यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता का असर कम हो सके।

चीन की चुनौती और समाधान

सप्लाई चेन की मजबूती के लिए चीन से आने वाले सस्ते ऑर्गेनिक केमिकल्स पर लगाम लगाना बहुत जरूरी हो गया है। अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का 41.8% केमिकल इंपोर्ट चीन से होता है। इसे बदलने के लिए सरकार प्रोडक्ट-स्पेसिफिक इंसेंटिव्स लाने की योजना बना रही है, ताकि लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा सके।

स्पेशलिटी केमिकल्स पर जोर

NITI Aayog की मदद से तैयार इस रोडमैप में बल्क कमोडिटी के बजाय हाई-वैल्यू स्पेशलिटी और ग्रीन केमिकल्स पर फोकस किया गया है। यह शिफ्ट कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बदलकर उनके मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी को बेहतर बना सकती है। हालांकि, मौजूदा समय में चीनी कंपनियों की आक्रामक प्राइसिंग के कारण भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।

निवेश और जोखिम

स्पेशलिटी केमिकल्स की तरफ बढ़ना काफी कैपिटल-इंटेंसिव काम है। इसके लिए सरकार इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंड्स से 'पेशेंट कैपिटल' जुटाने पर विचार कर रही है। निवेशकों के लिए अब कंपनियों का डेट मैनेजमेंट, कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और ग्रीन-केमिकल प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस ही वो मुख्य फैक्टर होंगे जिन पर नजर रखना जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.