📉 नतीजों की गहराई में
कंपनी के नतीजों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में, गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स (GSFC) का कंसोलिडेटेड ऑपरेशन रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 4.5% बढ़कर ₹2,941.05 करोड़ रहा, जबकि यह पिछले साल ₹2,814.07 करोड़ था। इस दौरान, नेट प्रॉफिट में 18.2% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई, जो ₹158.15 करोड़ तक पहुंच गया (पिछले साल ₹133.85 करोड़)। इसी तिमाही में बेसिक ईपीएस (EPS) भी ₹3.97 (पहले ₹3.36) रहा।
स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों पर नजर डालें तो, इसी तिमाही में रेवेन्यू 5.0% की बढ़ोतरी के साथ ₹2,894.10 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹2,755.15 करोड़ था। नेट प्रॉफिट में तो 31.5% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹157.17 करोड़ पर पहुंच गया (पिछले साल ₹119.47 करोड़)। स्टैंडअलोन बेसिक ईपीएस (EPS) बढ़कर ₹3.94 (पहले ₹3.00) दर्ज किया गया।
पहले नौ महीनों (9MFY26) के कंसोलिडेटेड नतीजों में भी अच्छी ग्रोथ दिखी। रेवेन्यू 10.5% बढ़कर ₹8,312.83 करोड़ रहा (पिछले साल ₹7,522.00 करोड़), और नेट प्रॉफिट 19.5% की बढ़ोतरी के साथ ₹620.86 करोड़ पर पहुंच गया (पिछले साल ₹519.40 करोड़)। कंसोलिडेटेड बेसिक ईपीएस ₹15.58 रहा, जो पिछले साल ₹13.03 था। इसी तरह, नौ महीनों के स्टैंडअलोन नतीजों में रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹8,205.66 करोड़ हुआ, और नेट प्रॉफिट 19.9% की बढ़ोतरी के साथ ₹617.28 करोड़ पर पहुंचा। स्टैंडअलोन बेसिक ईपीएस ₹15.49 (पहले ₹12.92) रहा।
सेगमेंट का जलवा
कंपनी के लिए फर्टिलाइजर प्रोडक्ट्स (Fertilizer Products) आज भी रेवेन्यू और प्रॉफिट का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं। नौ महीनों में, कंसोलिडेटेड आधार पर फर्टिलाइजर प्रोडक्ट्स ने ₹6,545.39 करोड़ का रेवेन्यू और ₹487.42 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) दिया, जो इसके प्रभुत्व को दर्शाता है। वहीं, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स (Industrial Products) ने ₹1,767.44 करोड़ का रेवेन्यू और ₹87.21 करोड़ का PBT दर्ज किया।
आगे की राह पर सस्पेंस
इस नतीजे के साथ सबसे खास बात यह रही कि मैनेजमेंट ने भविष्य के लिए कोई खास गाइडेंस (Guidance) या आउटलुक (Outlook) नहीं दिया। यानी, आने वाली तिमाहियों में कंपनी की क्या रणनीति रहेगी या ग्रोथ के क्या आसार हैं, इस पर मैनेजमेंट की ओर से कोई संकेत नहीं मिला। यह निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती थी। कंपनी ने भारत सरकार द्वारा अधिसूचित चार नए लेबर कोड (Labour Codes) का भी जिक्र किया है, जिनका डिफाइंड बेनिफिट ऑब्लिगेशन (Defined Benefit Obligation) पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
नतीजों में आगे की कोई दिशा न मिलने से निवेशकों के लिए भविष्य की रणनीति तय करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। भले ही कंपनी फर्टिलाइजर और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स जैसे ज़रूरी सेक्टर में है, लेकिन कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी नियमों में बदलाव जैसे जोखिम हमेशा बने रहते हैं। इन सभी बातों पर कंपनी की ओर से अधिक स्पष्टता की उम्मीद थी। नतीजों की समीक्षा M/s CNK & Associates LLP, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने की है।