GACL Share Price: ₹1029 Cr का बड़ा निवेश, पर Q3 में कंपनी को हुआ ₹11 Cr का नेट लॉस!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
GACL Share Price: ₹1029 Cr का बड़ा निवेश, पर Q3 में कंपनी को हुआ ₹11 Cr का नेट लॉस!
Overview

गुजरात अल्कालीज़ एंड केमिकल्स लिमिटेड (GACL) ने Q3 FY26 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू **1.46%** बढ़कर **₹1044.46 करोड़** रहा, जबकि EBITDA **19%** उछलकर **₹135 करोड़** तक पहुंच गया। हालांकि, कंपनी **₹11.16 करोड़** के नेट लॉस (Net Loss) में रही। इस बीच, बोर्ड ने भविष्य की ग्रोथ के लिए **₹1029 करोड़** के बड़े कैपेक्स (Capex) को मंजूरी दी है।

📉 तिमाही नतीजों का लेखा-जोखा

Q3 FY26 की तिमाही में GACL की स्टैंडअलोन परफॉरमेंस मिली-जुली रही। जहां कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.46% की मामूली बढ़ोतरी के साथ ₹1044.46 करोड़ दर्ज किया गया, वहीं EBITDA में 19% का जोरदार उछाल देखा गया और यह ₹135 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते इस्तेमाल से EBITDA में यह तेजी आई है।

इसके बावजूद, बॉटम लाइन (Bottom Line) दबाव में रही। स्टैंडअलोन प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 183.6% बढ़कर ₹12.62 करोड़ रहा, जिसमें ₹18.3 करोड़ के इन्वेंट्री वैल्यूएशन करेक्शन का भी एक बार का फायदा शामिल था। लेकिन, टैक्स के बाद कंपनी को ₹11.16 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस (Net Loss) हुआ। वहीं, अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹(1.52) दर्ज किया गया। कंसोलिडेटेड PBT भी ₹(8.79 करोड़) के नेगेटिव में रहा।

🚀 फ्यूचर ग्रोथ के लिए बड़ा कैपेक्स प्लान

भविष्य की ग्रोथ को देखते हुए, कंपनी के बोर्ड ने ₹1029 करोड़ की एक बड़ी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) योजना को हरी झंडी दे दी है। इसमें नए बायो-फ्यूल/कोल-फायर्ड बॉयलर के लिए ₹389 करोड़, दाहेज में 33,870 TPA का फूड ग्रेड फॉस्फोरिक एसिड प्लांट लगाने के लिए ₹560 करोड़ (जिससे सालाना ₹350 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है) और वडोदरा में KOH प्रोडक्शन कैपेसिटी को 80 TPD बढ़ाने के लिए ₹80 करोड़ (जिससे सालाना ₹130 करोड़ का एडिशनल रेवेन्यू मिलने का अनुमान है) शामिल हैं।

इन बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कंपनी ने GSFS से ₹250 करोड़ की क्रेडिट लाइन भी हासिल की है, जो इनके फाइनेंसिंग में मदद करेगी।

❓ मैनेजमेंट से सवाल और जोखिम

निवेशकों और एनालिस्ट्स के लिए मैनेजमेंट से मुख्य सवाल यही होंगे कि रेवेन्यू और EBITDA बढ़ने के बावजूद कंपनी नेट लॉस में क्यों है। खास तौर पर, पॉजिटिव PBT और नेगेटिव PAT के बीच के इस अंतर और लागतों पर सवाल पूछे जाएंगे। साथ ही, इन महत्वाकांक्षी विस्तार परियोजनाओं के पूरा होने और उनसे मुनाफा कमाने की समय-सीमा पर भी स्पष्टता मांगी जाएगी। इतने बड़े कैपेक्स के लिए फंडिंग और कर्ज के स्तर पर भी चर्चा हो सकती है।

कंपनी के 'अह्वान' प्रोजेक्ट (Ahvaan project) के तहत ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कॉस्ट कटिंग और डिजिटाइजेशन पर फोकस भविष्य में परफॉरमेंस को बेहतर बना सकता है। नए प्रोजेक्ट्स से सालाना ₹480 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। हालांकि, निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम इन बड़ी परियोजनाओं के एग्जीक्यूशन टाइमलाइन, लागत प्रबंधन और टॉप-लाइन ग्रोथ को सस्टेनेबल बॉटम-लाइन प्रॉफिट में बदलने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगा।

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