📊 नतीजों का लेखा-जोखा: EBITDA में जोरदार उछाल
Gujarat Alkalies and Chemicals Limited (GACL) ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी किए हैं। कंपनी की बिक्री आय (Revenue) Q3 FY2025-26 में 0.70% बढ़कर ₹1008 करोड़ रही, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹1001 करोड़ थी। हालांकि, असली कमाल ऑपरेशनल परफॉरमेंस में दिखा। कंपनी का EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) 19% उछलकर ₹135 करोड़ पर पहुँच गया, जो पिछले साल ₹113 करोड़ था। नौ महीनों की अवधि में EBITDA में 25% (₹80 करोड़) की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹394 करोड़ रहा।
प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में भी ज़बरदस्त सुधार हुआ है। Q3 FY2025-26 में PBT ₹13 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ़ ₹4 करोड़ था। नौ महीनों के लिए PBT ₹36 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹13 करोड़ के घाटे से एक बड़ा बदलाव है।
यहां समझिए वो बारीक बात:
इन नतीजों में एक खास 'वन-ऑफ' (one-off) एडजस्टमेंट का असर था। Spent Palladium (Pd) कैटेलिस्ट की इन्वेंट्री वैल्यूएशन में सुधार के लिए ₹18.3 करोड़ का एडजस्टमेंट किया गया। इस एडजस्टमेंट ने प्रॉफिट को बढ़ाया, लेकिन इसका असर 'Other Comprehensive Income' (OCI) पर पड़ा। इसी वजह से, भले ही PBT पॉजिटिव था, लेकिन कंपनी का स्टैंडअलोन Q3 PAT (Profit After Tax) ₹11.16 करोड़ के नेगेटिव में दर्ज हुआ।
खर्चों के मोर्चे पर, GACL ने नौ महीनों में एनर्जी कॉस्ट में कमी की है। रिन्यूएबल पावर का इस्तेमाल बढ़ाकर 35.7% कर लिया गया है, जो पिछले साल 29.7% था। इससे प्रोडक्शन कॉस्ट में कमी आने की उम्मीद है।
🚀 भविष्य के लिए बड़े कदम: ₹1029 करोड़ का एक्सपेंशन प्लान
अब बात करते हैं कंपनी के फ्यूचर प्लान की। GACL के बोर्ड ने लगभग ₹1029 करोड़ के बड़े एक्सपेंशन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें शामिल हैं:
- बायो-फ्यूल/कोल-फायर्ड बॉयलर: वडोदरा और दहेज में चार बॉयलर (प्रत्येक स्थान पर दो) लगाए जाएंगे, जिनकी अनुमानित लागत ₹389-390 करोड़ है। इन बॉयलर से स्टीम कॉस्ट कम होगी, 12 MW बिजली का उत्पादन होगा और कुल प्रोडक्शन एक्सपेंसेस में कमी आएगी।
- फूड ग्रेड फॉस्फोरिक एसिड प्लांट: दहेज में 33,870 TPA (टन प्रति वर्ष) क्षमता का प्लांट लगेगा, जिस पर करीब ₹560 करोड़ खर्च होंगे। यह प्लांट सालाना ₹350 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू लाने की क्षमता रखता है।
- कॉस्टिक सोडा/पोटाश क्षमता में बढ़ोतरी: वडोदरा में कॉस्टिक पोटाश (KOH) की प्रोडक्शन कैपेसिटी को 120 TPD (टन प्रति दिन) से बढ़ाकर 200 TPD किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत ₹80 करोड़ है। इससे सालाना करीब ₹130 करोड़ का नेट रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है।
कंपनी ने इन ग्रोथ इनिशिएटिव्स के लिए गुजरात स्टेट फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (GSFS) से ₹250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit) की सुविधा भी मंजूर की है।
📈 आउटलुक और अगली राह
आगे चलकर, GACL ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कॉस्ट कंट्रोल और डिजिटाइजेशन (प्रोजेक्ट "अह्वान" के ज़रिए) पर फोकस करेगी। इन बड़े एक्सपेंशन प्रोजेक्ट्स पर किए जा रहे भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर से कंपनी का ग्रोथ आउटलुक मजबूत दिख रहा है, खासकर फॉस्फोरिक एसिड और KOH जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स में। इन्वेस्टर्स को इन नए प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन टाइमलाइन और कॉस्ट-इफेक्टिवनेस पर बारीकी से नज़र रखनी होगी। हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ मामूली रही, लेकिन EBITDA और PBT में हुई ज़बरदस्त बढ़ोतरी, साथ ही स्ट्रेटेजिक कैपेसिटी एडिशन्स, ऑपरेशनल स्ट्रेंथ को दर्शाते हैं, भले ही अंतिम PAT में अकाउंटिंग एडजस्टमेंट की वजह से थोड़ी पेचीदगी हो।