Fineotex Chemical Limited (FCL) ने अपने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने जहाँ अपने रेवेन्यू में ज़बरदस्त ग्रोथ दिखाई है, वहीं मार्जिन पर दबाव एक चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच, कंपनी ने अमेरिका स्थित CrudeChem Technologies के अधिग्रहण को भी अंतिम रूप दे दिया है, जो इसके ग्लोबल विस्तार की योजनाओं को पंख लगाएगा।
नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही में, FCL के रेवेन्यू में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 45.90% का शानदार उछाल आया, जो ₹125.92 करोड़ से बढ़कर ₹183.71 करोड़ हो गया। पिछली तिमाही (Q2 FY26) के मुकाबले भी रेवेन्यू में 33.40% की ग्रोथ दर्ज की गई।
लेकिन, मुनाफे की बात करें तो EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में पिछले साल की तुलना में सिर्फ 1.59% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹34.84 करोड़ रहा। सबसे बड़ी चिंता का विषय EBITDA मार्जिन का 27.23% से घटकर 18.96% पर आ जाना है। यह पिछली तिमाही (Q2 FY26) के 22.53% मार्जिन से भी कम है।
इसी तरह, PAT (Profit After Tax) यानी टैक्स चुकाने के बाद कंपनी का मुनाफा साल-दर-साल 8.21% बढ़कर ₹30.12 करोड़ हुआ, लेकिन PAT मार्जिन 22.10% से गिरकर 16.39% पर आ गया। पिछली तिमाही के 18.94% से भी यह गिरावट है।
पहले नौ महीनों (9M FY26) के नतीजों पर नज़र डालें तो रेवेन्यू 10.87% बढ़कर ₹458.49 करोड़ हुआ, लेकिन PAT में 8.82% की गिरावट आई और यह ₹81.22 करोड़ रहा (9M FY25 में ₹89.08 करोड़ था)।
US अधिग्रहण और ग्लोबल विस्तार
इस तिमाही की सबसे बड़ी खबर है US-बेस्ड स्पेशियलिटी केमिकल कंपनी CrudeChem Technologies (CCT) ग्रुप में 53.33% की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी का अधिग्रहण। यह डील करीब $11.5 मिलियन (लगभग ₹95.55 करोड़) में पूरी हुई है। CCT का सालाना रेवेन्यू $68 मिलियन है और यह उत्तरी अमेरिका के ऑयलफील्ड केमिकल बाजार में सक्रिय है, जिसका आकार 2025 में $11.5 बिलियन आंका गया है। इस अधिग्रहण से FCL को नई तकनीक, बेहतर ग्राहक आधार और ग्लोबल विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है।
नई क्षमताएं और फोकस क्षेत्र
कंपनी ने अगस्त 2025 में ही 15,000 MTPA (मीट्रिक टन प्रति वर्ष) क्षमता वाली एक नई अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ₹60 करोड़ के निवेश से महाराष्ट्र के अंबरनाथ में शुरू की है। FCL अब ऑयल एंड गैस और वाटर ट्रीटमेंट जैसे उभरते सेक्टरों में अपनी ग्रोथ पर फोकस कर रही है, खासकर पर्यावरण-अनुकूल (eco-friendly) और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स पर ज़ोर दे रही है।
मुख्य चिंताएं, पिछला रिकॉर्ड और आगे की रणनीति
मुख्य चिंताएं: रेवेन्यू में ज़बरदस्त उछाल के बावजूद मार्जिन में आई भारी गिरावट मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है। इसके पीछे कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, कड़ा कॉम्पिटिशन या नए अधिग्रहण को सफलतापूर्वक कंपनी में इंटीग्रेट करने की चुनौतियां हो सकती हैं। 9M PAT में गिरावट पर भी निवेशक पैनी नज़र रखेंगे।
एक पुरानी घटना: यह ध्यान देने योग्य है कि जनवरी 2018 में, SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने कंपनी के प्रमोटर संजय टिबरेवाल पर ₹25 लाख का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना कंपनी के 2011 के IPO के दौरान डिस्क्लोजर नियमों के उल्लंघन और शेयर सब्सक्रिप्शन के प्री-अरेंजमेंट के आरोप में लगाया गया था। SEBI ने पाया था कि टिबरेवाल ने IPO प्रॉस्पेक्टस में किए गए खुलासों का पालन नहीं किया था और निवेशकों को गुमराह करने वाली प्रैक्टिस में शामिल थे।
भविष्य का रास्ता: मैनेजमेंट US अधिग्रहण और ग्लोबल ट्रेड के अच्छे संकेतों को लेकर उत्साहित है। कंपनी अपनी बढ़ी हुई क्षमताओं का इस्तेमाल कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और स्पेशियलिटी फॉर्मूलेशन के लिए करना चाहती है। सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स पर फोकस जारी रहेगा और आगे भी inorganic growth (अकार्बनिक विकास) के मौके तलाशे जाएंगे।
सेक्टर में कैसी है स्थिति?
भारत का स्पेशियलिटी केमिकल सेक्टर ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव और बढ़ती मांग के चलते तेजी से बढ़ रहा है। Pidilite Industries, Aarti Industries, Vinati Organics, और SRF जैसी कंपनियाँ भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। हालांकि, इस सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आम है, जिसका असर मार्जिन पर दिखता है। Fineotex के हालिया नतीजे इसी ट्रेंड को दर्शाते हैं। US अधिग्रहण के जरिए कंपनी खुद को बाजार में अलग पहचान दिलाने की कोशिश कर रही है।