FACT और BPCL में हुई बड़ी डील! फर्टिलाइजर के लिए मिलेगा सल्फरिक एसिड

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AuthorNeha Patil|Published at:
FACT और BPCL में हुई बड़ी डील! फर्टिलाइजर के लिए मिलेगा सल्फरिक एसिड

The Fertilisers and Chemicals Travancore Ltd (FACT) ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के साथ एक अहम करार किया है। इस समझौते के तहत BPCL अपनी नई कोच्चि यूनिट से FACT को सालाना **1.5 लाख टन** सल्फरिक एसिड की सप्लाई करेगा। यह डील FACT के उत्पादन घाटे को पूरा करने में मदद करेगी और भविष्य के विस्तार की तैयारी में अहम साबित होगी।

प्रोडक्शन गैप को भरेगी यह डील

The Fertilisers and Chemicals Travancore Ltd (FACT) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के बीच एक स्ट्रैटेजिक सप्लाई एग्रीमेंट हुआ है। इस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के अनुसार, BPCL अपनी कोच्चि रिफाइनरी में नई शुरू हुई यूनिट से FACT को हर साल 1.5 लाख टन सल्फरिक एसिड सप्लाई करेगा। सल्फरिक एसिड फर्टिलाइजर बनाने के लिए एक जरूरी कच्चा माल है।

FACT के लिए बड़ा कदम

FACT के लिए यह पार्टनरशिप ऑपरेशनल लेवल पर बहुत बड़ी डेवलपमेंट है। कंपनी फिलहाल सालाना करीब 5.5 लाख टन सल्फरिक एसिड का प्रोडक्शन करती है, जबकि उसे अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लगभग 7.5 लाख टन की आवश्यकता होती है। इस 1.5 लाख टन की अतिरिक्त सप्लाई से FACT को बाहरी खरीद पर अपनी निर्भरता काफी कम करनी पड़ेगी। इस सप्लाई चेन गैप को मैनेज करना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि फर्टिलाइजर प्रोडक्शन इस अहम इनपुट की उपलब्धता और कीमत पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है।

भविष्य की प्लानिंग और BPCL के लिए नई शुरुआत

कंपनी की इंटरनल प्लानिंग के अनुसार, भविष्य में विस्तार की योजनाओं से सल्फरिक एसिड की मांग 2 लाख टन और बढ़ सकती है। अगर सप्लाई लगातार बनी नहीं रही, तो 2027-28 फाइनेंशियल ईयर तक यह कमी 3.5 लाख टन तक पहुंच सकती है। इस एग्रीमेंट से भविष्य के प्रोडक्शन टारगेट को लेकर एक स्थिरता आएगी।

यह प्रोजेक्ट BPCL के लिए भी एक अहम पड़ाव है, क्योंकि यह रिफाइनरी के सल्फरिक एसिड प्रोडक्शन में पहला कदम है। इस डाइवर्सिफिकेशन से ऑयल मार्केटिंग कंपनी अपने रिफाइनिंग ऑपरेशंस के साथ इंटीग्रेटेड हाई-वैल्यू केमिकल प्रोडक्शन में उतर रही है। BPCL इन्वेस्टर्स के लिए, यह पारंपरिक फ्यूल से आगे बढ़कर अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को एक्सपैंड करने की एक स्ट्रैटेजिक कोशिश है। हालांकि, इस नए सेगमेंट का फाइनेंशियल योगदान प्लांट की एफिशिएंसी और केमिकल की मार्केट डिमांड पर निर्भर करेगा।

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