खाद बनाने वाली सरकारी कंपनी FACT यानी फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर (FACT) मुश्किल में है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और कर्ज के बोझ से जूझ रही कंपनी ने केंद्र सरकार से मदद मांगी है। FACT ₹6,350 करोड़ का बड़ा मॉडर्नाइजेशन प्लान लेकर आई है, ताकि देश में उत्पादन बढ़ाया जा सके और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम हो। अब देखना ये है कि कंपनी को कर्ज पुनर्गठन (Debt Restructuring) या स्पेशल रिवाइवल पैकेज मिलता है या नहीं।
वित्तीय दबाव और कंपनी की स्थिति
फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर (FACT), जो देश की एक प्रमुख सरकारी खाद निर्माता कंपनी है, ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय (Union Ministry of Chemicals and Fertilizers) से तुरंत पॉलिसी और वित्तीय मदद की अपील की है। एक सांसद द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर कंपनी की खराब वित्तीय हालत साफ नजर आ रही है। कंपनी पर कच्चे माल की ऊंची लागत और भारी कर्ज का बोझ है, जिससे उसके कामकाज पर खतरा मंडरा रहा है।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें बनीं सिरदर्द
मुख्य समस्या फॉस्फेटिक फर्टिलाइजर्स और अमोनियम सल्फेट के उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। इनपुट प्राइस में उछाल से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ा है और उसकी कॉम्पिटिटिव पोजीशन बनाए रखना मुश्किल हो गया है। इन चुनौतियों के बावजूद, पिछले फाइनेंशियल ईयर में FACT ने 11.4 लाख टन से ज्यादा का प्रोडक्शन किया और 11 लाख टन से ज्यादा खाद बेची। कंपनी 3,000 से ज्यादा लोगों को सीधी और अप्रत्यक्ष रोजगार भी देती है।
कर्ज पुनर्गठन और विस्तार की योजना
इस मुश्किल से निकलने के लिए, केंद्र सरकार से लिए गए लगभग ₹1,000 करोड़ के लोन को रीस्ट्रक्चर करने की मांग की जा रही है। इसका मकसद ब्याज के बोझ को कम करना है, ताकि कंपनी को कर्ज चुकाने में जा रहा पैसा अपने जरूरी प्रोजेक्ट्स में लगाने के लिए मिल सके। लिक्विडिटी की यह जरूरत कंपनी के प्लान किए गए कैपिटल स्पेंडिंग प्रोजेक्ट्स के लिए बहुत अहम है। FACT के बोर्ड ने पहले ही ₹6,350 करोड़ के मॉडर्नाइजेशन और विस्तार प्लान को मंजूरी दे दी है। इस प्रोग्राम का लक्ष्य देश की खाद उत्पादन क्षमता को बढ़ाना, मैन्युफैक्चरिंग एफिशिएंसी को बेहतर बनाना और महंगी इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करके राष्ट्रीय खाद सुरक्षा में योगदान देना है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि मंत्रालय स्पेशल रिवाइवल पैकेज की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देता है। आगे चलकर, मौजूदा कर्ज पर ब्याज दर में राहत, पेंडिंग सब्सिडी के भुगतान की स्थिति और LNG जैसे कच्चे माल पर टैक्स छूट से जुड़ी चर्चाएं अहम होंगी। इन मोर्चों पर कोई भी फैसला इस बात पर असर डालेगा कि FACT अपने विस्तार प्लान को बैलेंस शीट को और कमजोर किए बिना कितनी तेजी से लागू कर पाती है। कंपनी की मौजूदा डेट-टू-इक्विटी प्रोफाइल को मैनेज करने की क्षमता, साथ ही बड़े पैमाने पर इन प्रोजेक्ट्स को फंड करने की उसकी काबिलियत, स्टेकहोल्डर्स के लिए मुख्य निगरानी बिंदु बने रहेंगे।
