रिकॉर्ड रेवेन्यू पर शेयर में तूफानी तेजी, पर मुनाफे पर आई
Epigral का शेयर आज 10% से ज्यादा चढ़ गया। इसकी मुख्य वजह कंपनी का ₹736 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही रेवेन्यू रहा। हालांकि, दमदार बिक्री के बावजूद, नेट प्रॉफिट में 6.84% की गिरावट आई और EBITDA भी 4.96% घटकर ₹168.01 करोड़ पर आ गया। यह दिखाता है कि लागत बढ़ने से कंपनी के मार्जिन पर दबाव है, भले ही बिक्री बढ़ रही हो।
विस्तार पर भारी निवेश और वैल्यूएशन में छूट
Q4 FY26 में Epigral का रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 17.29% बढ़कर ₹736.16 करोड़ रहा। यह मजबूती डिमांड और मेंटेनेंस के बाद सामान्य ऑपरेशंस में वापसी के कारण हुई। लेकिन, नेट प्रॉफिट ₹86.89 करोड़ से गिरकर ₹80.95 करोड़ पर आ गया। EBITDA में भी 4.96% की गिरावट दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि बढ़ती लागतें, खासकर CPVC सेगमेंट के लिए कच्चे माल की कीमतें, मार्जिन को प्रभावित कर रही हैं।
Epigral भविष्य की ग्रोथ के लिए भारी निवेश कर रही है। FY26 में कंपनी ने विस्तार पर ₹394 करोड़ खर्च किए। इसमें CPVC रेजिन कैपेसिटी को 150,000 TPA और एपिक्लोरोहाइड्रिन को 100,000 TPA तक बढ़ाना शामिल है। साथ ही, कंपनी अपनी रिन्यूएबल एनर्जी आउटपुट भी बढ़ा रही है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 24.93% है, जो काफी अच्छा है।
इसके बावजूद, Epigral अपने साथियों की तुलना में काफी कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही है। इसका Trailing Twelve Month (TTM) प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 15.5x है, जो Clean Science (लगभग 35.66x) और Alkyl Amines (लगभग 42.80x) जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी कम है। सेक्टर का औसत P/E 30x-42x है। यह वैल्यूएशन गैप बताता है कि निवेशक इसके मार्जिन की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी को लेकर थोड़े चिंतित हैं। हालांकि, कंपनी की फाइनेंसेस मजबूत हैं, जिसमें 0.31 का डेट-टू-इक्विटी रेशियो है।
सेक्टर का दबाव और भविष्य की मांग
शेयर में गिरावट के बावजूद तेजी इस बात पर जोर देती है कि निवेशक वर्तमान मार्जिन की चिंताओं से ज्यादा भविष्य की ग्रोथ पर ध्यान दे रहे हैं। केमिकल इंडस्ट्री बाहरी दबावों का सामना कर रही है, जैसे अस्थिर तेल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल मुद्दे, जो Epigral जैसी कंपनियों के लिए कच्चे माल और ऊर्जा की लागत बढ़ा सकते हैं। मैनेजमेंट मजबूत डिमांड की बात कर रहा है, लेकिन ये ग्लोबल इकोनॉमिक फैक्टर एक अनिश्चितता जोड़ते हैं, जो वैल्यूएशन डिस्काउंट का कारण हो सकता है।
एनालिस्ट्स का भरोसा
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि अगर ग्लोबल इकोनॉमिक कंडीशन स्थिर रहती है, तो FY27 में भी डिमांड बनी रहेगी। एनालिस्ट्स भी इससे सहमत हैं। उन्होंने "Strong Buy" कंसेंसस बनाए रखा है और 12 महीने का औसत प्राइस टारगेट ₹2,000 रखा है। यह पॉजिटिव आउटलुक बताता है कि बाजार का मानना है कि Epigral के विस्तार प्लान भविष्य में वैल्यू बढ़ाएंगे, जो वर्तमान प्रॉफिट मार्जिन की चिंताओं से कहीं ज्यादा होगा।
