केमिकल सेक्टर की दिग्गज कंपनी Epigral ने अपना भविष्य का रोडमैप तैयार कर लिया है। कंपनी ने साल 2031 तक रेवेन्यू को दोगुना यानी **₹5,000 करोड़** तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस ग्रोथ के लिए कंपनी गुजरात के दाहेज प्लांट में **₹650 करोड़** का बड़ा निवेश करने जा रही है।
उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा
कंपनी अपनी क्षमता का विस्तार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ₹650 करोड़ के इस निवेश के जरिए CPVC रेज़िन का उत्पादन 75,000 टन से बढ़कर 150,000 टन सालाना हो जाएगा। वहीं, एपिक्लोरोहाइड्रिन (Epichlorohydrin) की क्षमता को भी दोगुना करते हुए 100,000 टन सालाना तक पहुंचाया जाएगा।
मजबूती का नया फार्मूला
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कंपनी इस विस्तार के लिए किसी बाहरी कर्ज का सहारा नहीं ले रही है। इसके बजाय, इंटरनल कैश रिजर्व का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कंपनी पर वित्तीय दबाव कम रहेगा।
Epigral की रणनीति आयातित रसायनों को घरेलू उत्पादन से बदलने की है। खास बात यह है कि कंपनी Epichlorohydrin के लिए क्रूड-ऑयल आधारित तकनीक की जगह ग्लिसरीन-आधारित प्रक्रिया अपना रही है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी के मुनाफे पर कम पड़ेगा।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
कंपनी ने भविष्य में दाहेज में ही एक और नई केमिस्ट्री लाइन शुरू करने की योजना बनाई है, जिसके लिए ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश संभावित है। हालांकि, निवेशकों को ग्लोबल सप्लाई-डिमांड साइकिल और कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता जैसे जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता को बाजार में कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से खपा पाती है।
