Epigral Ltd ने पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का मुनाफा **38%** घटकर **₹99.74 करोड़** रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह टैक्स दरों में हुआ बदलाव बताया जा रहा है। हालांकि, कंपनी ने **₹600 करोड़** के बड़े निवेश से एपॉक्सी रेजिन (Epoxy Resin) और फॉर्मूलेशन मार्केट में उतरने का ऐलान किया है।
Detailed Coverage
टैक्स के बोझ से मुनाफा घटा?
Epigral Ltd, जो पहले Meghmani Finechem के नाम से जानी जाती थी, ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Consolidated Net Profit) ₹99.74 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹160.79 करोड़ के प्रॉफिट की तुलना में 38% कम है। कंपनी ने साफ किया है कि यह गिरावट मुख्य रूप से टैक्स रेट में हुए बदलाव के कारण है। अप्रैल-जून 2026 से लागू हुए नए कॉरपोरेट टैक्स रेट 25.17% के कारण, कंपनी की डिफर्ड टैक्स लायबिलिटी (Deferred Tax Liability) में ₹81 करोड़ का एडजस्टमेंट हुआ, जिसने रिपोर्ट किए गए प्रॉफिट को प्रभावित किया।
₹600 करोड़ का बड़ा एक्सपेंशन प्लान
जहां मुनाफा कुछ कम हुआ, वहीं कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में ग्रोथ दिखी है। इस तिमाही में कंपनी की कुल इनकम ₹709.46 करोड़ रही। इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए, कंपनी के बोर्ड ने ₹600 करोड़ के बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) प्लान को मंजूरी दी है। इस निवेश से गुजरात में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाई जाएंगी, जो एपॉक्सी रेजिन और फॉर्मूलेशन बिजनेस में कंपनी की एंट्री को मार्क करेगा।
एपॉक्सी रेजिन में स्ट्रैटेजिक कदम
इन नई यूनिट्स की सालाना प्रोडक्शन कैपेसिटी 1.25 लाख टन रहने की उम्मीद है। एपॉक्सी रेजिन मार्केट में उतरकर, Epigral हाई-परफॉरमेंस मैटेरियल्स में अपनी पोजीशन मजबूत करना चाहती है, जिनका इस्तेमाल इंडस्ट्रियल कोटिंग्स, ऑटोमोटिव पार्ट्स और विंडमिल ब्लेड्स जैसे सेक्टर्स में होता है। इन नई यूनिट्स से कमर्शियल प्रोडक्शन 2028 के फाइनेंशियल ईयर के दूसरे हाफ तक शुरू होने की उम्मीद है। यह कंपनी की फॉरवर्ड इंटीग्रेशन स्ट्रेटेजी (Forward Integration Strategy) का हिस्सा है, जिससे वह मौजूदा केमिकल वैल्यू चेन्स का इस्तेमाल करके ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स बनाएगी।
इंटरमीडिएट्स के लिए मल्टी-पर्पस प्लांट
एपॉक्सी प्रोजेक्ट के अलावा, Epigral एक मल्टी-पर्पस प्लांट भी बना रही है, जो उसके एपिक्लोरोहाइड्रिन (Epichlorohydrin) और क्लोरोटोल्यून्स (Chlorotoluenes) चेन्स से डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स को प्रोसेस करेगा। इस फैसिलिटी का मकसद फार्मास्युटिकल (Pharmaceutical) और एग्रोकेमिकल (Agrochemical) इंटरमीडिएट्स के साथ-साथ वाटर ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की डोमेस्टिक डिमांड को पूरा करना है।
निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि भारतीय केमिकल इंडस्ट्री इस समय ग्लोबल प्राइसिंग वोलेटिलिटी (Global Pricing Volatility) और स्पेशियलिटी सेगमेंट्स में कंसिस्टेंट वॉल्यूम ग्रोथ की जरूरत जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। जैसे-जैसे Epigral इस ₹600 करोड़ के एक्सपेंशन को आगे बढ़ाएगी, प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन टाइमलाइन, नई कैपेसिटी के साथ प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता और इन कैपिटल आउटलेज का कंपनी की डेट पोजीशन पर असर प्रमुख मॉनिटरेबल रहेंगे। 2028 तक कमर्शियल लॉन्च के लंबे इंतजार को देखते हुए, शेयरहोल्डर्स को कंस्ट्रक्शन प्रोग्रेस और रॉ मटेरियल कॉस्ट ट्रेंड्स पर तिमाही अपडेट्स पर नजर रखनी होगी।
