Q3 FY26: मजबूती के साथ वापसी
Deepak Nitrite ने केमिकल सेक्टर की चुनौतियों के बीच Q3 FY26 में अपनी ऑपरेशनल परफॉरमेंस का लोहा मनवाया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि (YoY) के मुकाबले 3% बढ़कर ₹1,983 करोड़ दर्ज किया गया। सबसे खास बात यह रही कि EBITDA में 16% का जोरदार उछाल आया, जो ₹219 करोड़ पर पहुंच गया। इन बेहतर नतीजों के पीछे कंपनी के बेहतर कॉस्ट मैनेजमेंट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बड़ा श्रेय जाता है। EBITDA मार्जिन्स भी सुधरकर 11.1% हो गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 9.9% थे।
9 महीनों की तस्वीर: गिरावट की वजहें
हालांकि, साल के पहले नौ महीनों (9M FY26) के वित्तीय आंकड़े कुछ चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 6% घटकर ₹5,820 करोड़ रह गया। वहीं, EBITDA में 21% की भारी गिरावट आई और यह ₹658 करोड़ पर आ गया। प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) एक्सेप्शनल आइटम्स से पहले 30% की गिरावट के साथ ₹469 करोड़ रहा। इसी तरह, नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी नौ महीनों में 33% की गिरावट के साथ ₹331 करोड़ दर्ज किया गया। Q3 में ₹12.84 करोड़ के प्रोविडेंट फंड प्रोविजन ने भी PBT पर असर डाला।
भविष्य की रणनीति और उम्मीदें
Deepak Nitrite के मैनेजमेंट को आने वाले Q4 FY26 से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है। कंपनी ने भविष्य के लिए कई ग्रोथ ड्राइवर्स की पहचान की है:
- वर्टिकल इंटीग्रेशन: दीपक केम टेक लिमिटेड (DCTL) द्वारा अमोनिया-नाइट्रेशन-अमाइन्स वैल्यू चेन के वर्टिकल इंटीग्रेशन से मार्जिन और एफिशिएंसी में सुधार की उम्मीद है।
- US ड्यूटी का हटना: 26 जनवरी, 2026 से सोडियम नाइट्राइट एक्सपोर्ट पर लगे 45.16% US एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) का हटना कंपनी के एक्सपोर्ट बिजनेस के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित होगा।
- प्लांट विस्तार: पॉलीकार्बोनेट प्लांट को जर्मनी से भारत शिफ्ट करने का काम जारी है, जिससे डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
- नए प्लांट्स की शुरुआत: नंदेश्वरी में नाइट्रिक एसिड प्लांट और दहेज में नाइट्रेशन व दूसरा हाइड्रोजन प्लांट पहले ही शुरू हो चुके हैं। MIBK/MIBC प्रोजेक्ट भी इसी तिमाही में चालू होने की उम्मीद है।
- R&D में निवेश: कंपनी ₹100 करोड़ से ज्यादा का निवेश एक नए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर में कर रही है, जो नवाचार (Innovation) और डिजिटलाइजेशन पर कंपनी के फोकस को दर्शाता है।
सेगमेंट परफॉरमेंस का विश्लेषण
- एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स: इस सेगमेंट का रेवेन्यू Q3 में 18% बढ़कर ₹652 करोड़ हुआ। हालांकि, चीनी डंपिंग और बाजार में ओवरकैपेसिटी जैसी चुनौतियों के कारण EBIT 11% गिरकर ₹15 करोड़ रह गया।
- फेनोलिक्स: यह सेगमेंट कंपनी के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा है। इसका रेवेन्यू Q3 में 2% घटकर ₹1,334 करोड़ रहा। इसके बावजूद, बढ़ी हुई बिक्री मात्रा और बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज के कारण EBIT में 20% का शानदार इजाफा हुआ, जो ₹145 करोड़ रहा। इस सेगमेंट के EBIT मार्जिन्स भी सुधरकर 10.9% हो गए, जो पिछले साल 8.9% थे।
कंपनी की मुख्य रणनीति मजबूत इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन बनाने पर केंद्रित है, जैसे फेनोल से पॉलीकार्बोनेट का रूट। इसका लक्ष्य विश्व स्तरीय गुणवत्ता और क्षमता हासिल करना है, साथ ही लागत को अनुकूलित करना और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ना है। यह एकीकृत दृष्टिकोण केमिकल मार्केट की साइक्लिकल प्रकृति से निपटने में मदद करेगा।