📉 नतीजों पर पड़ी कंटिंजेंट लायबिलिटीज की मार
DCW Limited ने अपने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे जारी किए हैं, जो शेयरधारकों के लिए चिंता का विषय हैं। कंपनी की कुल आय (Total Income) में 9.51% का इजाफा हुआ और यह ₹524.64 करोड़ पर पहुंच गई। लेकिन, इस टॉप-लाइन ग्रोथ का असर बॉटम लाइन पर नहीं दिखा। कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) पिछले साल की इसी तिमाही के ₹20.25 करोड़ की तुलना में 62.79% घटकर सिर्फ ₹7.53 करोड़ रह गया। नतीजतन, नेट प्रॉफिट भी 63.54% की भारी गिरावट के साथ ₹4.89 करोड़ पर सिमट गया। बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹0.45 से घटकर ₹0.17 हो गया।
तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर देखें तो, कुल आय में 3.53% की गिरावट आई, जो ₹52,464.09 लाख रही। PBT में 64.22% की तेज गिरावट आई और यह ₹753.14 लाख रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 64.55% लुढ़ककर ₹489.54 लाख पर आ गया।
सेगमेंट की परफॉरमेंस:
कंपनी के बेसिक केमिकल्स सेगमेंट में इस तिमाही में इंटरेस्ट और टैक्स से पहले ₹13.74 करोड़ का नुकसान हुआ, जो कि पिछली अवधियों के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है। हालांकि, स्पेशलिटी केमिकल्स सेगमेंट ने अच्छी परफॉरमेंस जारी रखी और ₹38.09 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्स दर्ज किया।
सबसे बड़ा सिरदर्द: ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की देनदारी
सबसे चिंताजनक बात कंपनी की कंटिंजेंट लायबिलिटीज (Contingent Liabilities) हैं, जिनका कुल आंकड़ा ₹10,000 करोड़ से भी ऊपर चला गया है। ऑडिटर की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें बिजली टैक्स की ₹5,491.45 लाख की मांग, कस्टम ड्यूटी की ₹1,243.77 लाख की मांग के साथ ₹2,600.00 लाख का ब्याज और पेनाल्टी, और इनकम टैक्स की ₹106.08 लाख की मांग शामिल है। साथ ही, MAT क्रेडिट में ₹2,893.15 लाख की कमी की गई है। इन सभी मांगों को मिलाकर कुल संभावित जोखिम ₹10,000 करोड़ से काफी ज्यादा है। कंपनी का कहना है कि ये मांगें जायज नहीं हैं और वह कानूनी रास्ते अपना रही है, लेकिन इन मांगों के लिए कोई प्रोविजन (Provision) न करना एक बड़ा वित्तीय जोखिम है।
आगे क्या?
कंपनी ने भविष्य के लिए कोई गाइडेंस (Guidance) जारी नहीं किया है। DCW Limited के लिए सबसे बड़ा जोखिम ₹10,000 करोड़ से अधिक की ये कंटिंजेंट लायबिलिटीज हैं। हालांकि मैनेजमेंट इनके खिलाफ लड़ने का दावा कर रहा है, पर कोई प्रोविजन न होने के कारण यदि कोई प्रतिकूल फैसला आता है तो कंपनी की वित्तीय सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। निवेशकों को इन टैक्स और ड्यूटी से जुड़ी मांगों पर कानूनी कार्यवाही पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। साथ ही, तिमाही के कमजोर नतीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है।