DCM Shriram ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे जारी किए हैं। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 107% की भारी उछाल के साथ ₹370 करोड़ पर पहुंच गया।
यह शानदार बढ़ोतरी मुख्य रूप से एक बार के टैक्स क्रेडिट और कुछ एक्सेप्शनल आइटम्स के रिवर्सल की वजह से हुई, जिससे कंपनी को लगभग ₹117 करोड़ का फायदा हुआ।
कंपनी का कुल रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹3,193 करोड़ रहा। हालांकि, ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर लागतों का दबाव साफ दिखा, जिससे कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन सिकुड़ गए।
इन नतीजों के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई और शेयर 14 मई 2026 को 4.5% से ज्यादा गिर गया। यह एक साल के 7% से 15% तक के Gains के विपरीत था, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशक इस Profit Boost को कोर बिज़नेस की मजबूती के बजाय अकाउंटिंग एडजस्टमेंट मान रहे हैं।
कंपनी के केमिकल्स सेगमेंट ने अच्छा प्रदर्शन किया, पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए रेवेन्यू 38% बढ़ा। बढ़ी हुई एनर्जी कीमतों के बावजूद, ऊंची कीमतों ने उत्पादन लागत में 9-10% की बढ़ोतरी को कवर करने में मदद की।
शुगर और एग्री सेगमेंट में, शुगर एक्सपोर्ट पर लगे बैन का कोई खास असर नहीं हुआ, क्योंकि एक्सपोर्ट कंपनी के कुल रेवेन्यू का छोटा हिस्सा है। हालांकि, गन्ने की कम उपलब्धता के चलते इस साल उत्पादन घटा है।
वहीं, Fenesta बिल्डिंग सिस्टम्स डिवीजन, जिसका टर्नओवर ₹1,100 करोड़ है, के मार्जिन गिरकर 10% पर आ गए, जबकि कंपनी 14% मार्जिन का अनुमान लगा रही थी। इसकी वजह PVC, ग्लास और एल्युमीनियम जैसे रॉ मटेरियल की लागत में 15-60% की बढ़ोतरी और नए प्रोडक्ट्स पर कम मार्जिन रहा। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि अगले एक से दो साल में मार्जिन सुधरकर 12-13% पर आ जाएंगे।
यदि इन एक बार के फायदों को हटा दें, तो Profit Before Tax (PBT) में मामूली गिरावट आई, जो ऑपरेशनल परफॉरमेंस में सुस्ती दिखाती है। ऑपरेटिंग मार्जिन 11.13% से घटकर 14.27% (एक साल पहले) रह गया, और EBITDA मार्जिन भी 13.4% से घटकर 10.5% हो गया।
कंपनी पर नेट डेट भी बढ़कर ₹1,767 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹1,395 करोड़ था। यह बढ़त नए प्लांट्स और एक्विजिशन पर हुए खर्च के कारण हुई है।
भविष्य की ग्रोथ के लिए, DCM Shriram ₹1,000-1,500 करोड़ के इन्वेस्टमेंट की योजना बना रहा है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, क्लोरीन डाउनस्ट्रीम ऑपरेशन्स, एल्युमीनियम एक्सट्रूजन और एक नए जॉइंट वेंचर के तहत हाई-टेक पॉलीमर कंपाउंडिंग शामिल हैं।
इन सब के बावजूद, मैनेजमेंट अपनी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी को लेकर कॉन्फिडेंट है। हालांकि, निवेशक बढ़ती लागतों के दबाव और अनिश्चितता के बीच यह देखने के लिए उत्सुक होंगे कि रेवेन्यू ग्रोथ किस तरह से स्थिर और स्वस्थ मार्जिन में तब्दील होती है।
