Cosmo First Limited ने Q3 FY26 के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की कंसोलिडेटेड सेल्स में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 28% का जबरदस्त इजाफा हुआ और यह ₹899 करोड़ पर पहुंच गई। यह ग्रोथ मुख्य रूप से सेल्स वॉल्यूम में 29% की बढ़त से आई। हालांकि, कंपनी के EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में मात्र 19% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹103 करोड़ रहा। इसकी वजह कंपनी के मुख्य BOPP और BOPET फिल्म बिजनेस में मार्जिन पर पड़ा दबाव है, जो इंपोर्ट (आयात) बढ़ने, अमेरिका के टैरिफ और इन्वेंट्री लॉस की वजह से हुआ।
मार्जिन पर क्यों पड़ा दबाव?
nतीजों में मिली-जुली तस्वीर दिखी। जहां एक ओर सेल्स वॉल्यूम में बढ़त और स्पेशियलिटी केमिकल मार्जिन का सुधरना अच्छी बात रही, वहीं दूसरी ओर कई वजहों ने कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाला। BOPP फिल्म के ग्रॉस मार्जिन गिरकर ₹13 प्रति किलोग्राम पर आ गए, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹21 प्रति किलोग्राम थे। इसी तरह, BOPET फिल्म के मार्जिन भी ₹12 प्रति किलोग्राम पर आ गए, जो पिछले साल ₹21 प्रति किलोग्राम थे। हालांकि, इनमें पिछले तिमाही से सुधार दिखा।
ये मार्जिन गिरावट कई कारणों से हुई:
- बढ़ता इंपोर्ट: इंपोर्टेड फिल्मों की ज्यादा मात्रा ने घरेलू कीमतों पर दबाव डाला।
- अमेरिका के टैरिफ: अमेरिका में लगे टैरिफ ने प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित किया, हालांकि Q1 FY27 से इसमें कमी आने की उम्मीद है।
- BOPP लाइन शटडाउन: एक BOPP लाइन के अस्थायी बंद होने से वॉल्यूम का नुकसान हुआ और लगभग ₹4 करोड़ का असर पड़ा।
- इन्वेंट्री लॉस: कच्चे माल की कीमतों में गिरावट के कारण ₹8.4 करोड़ का एकमुश्त इन्वेंट्री लॉस हुआ।
- ग्रेचुटी लायबिलिटी: ग्रेचुटी देनदारी में बढ़ोतरी से लागत ₹4 करोड़ और बढ़ गई।
इन सब वजहों का कुल मिलाकर तिमाही नतीजों पर लगभग ₹19 करोड़ का नकारात्मक असर पड़ा। डेप्रिसिएशन (मूल्यह्रास) और इंटरेस्ट (ब्याज) खर्च में बढ़ोतरी के कारण, जो हाल ही में शुरू हुई नई कैपेसिटीज के चलते हुआ, PAT (नेट प्रॉफिट) भी पिछले साल की तुलना में कम रहा।
कर्ज घटाने पर फोकस
दिसंबर 2025 तक कंपनी पर कुल नेट डेट (शुद्ध कर्ज) ₹1,215 करोड़ था, जो पिछली तिमाही से ₹20 करोड़ कम है। नेट डेट टू EBITDA रेश्यो 2.8 गुना है और नेट डेट टू इक्विटी रेश्यो 0.8 गुना है। मैनेजमेंट ने अगले 2-3 सालों में हर साल ₹200 करोड़ से ₹250 करोड़ तक नेट डेट कम करने की स्पष्ट योजना बनाई है।
स्पेशियलिटी की ओर बढ़ता कदम
कंपनी का बड़ा Capex (कैपिटल एक्सपेंडिचर) साइकिल अब लगभग पूरा हो चुका है। अब ध्यान ₹1,100 करोड़ से ज्यादा के निवेश वाली नई कैपेसिटीज के बेहतर इस्तेमाल पर है। Cosmo First का लक्ष्य अगले कुछ सालों में अपने स्पेशियलिटी बिजनेस का कुल सेल्स में हिस्सा लगभग 70% तक बढ़ाना है, जो FY27 में अनुमानित ~50% से ज्यादा है।
स्पेशियलिटी केमिकल सेगमेंट ने Q3 FY26 में ₹52 करोड़ की सेल्स 25% EBITDA मार्जिन के साथ दर्ज की। इसके रिजिड पैकेजिंग बिजनेस, Cosmo Plastech ने EBITDA ब्रेकइवन हासिल किया और करीब 70% कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर रहा। वहीं, Zigly जैसे कंज्यूमर बिजनेस भी बढ़ रहे हैं, जिसमें Zigly ने Q3 FY26 में पिछले साल के मुकाबले 50% से ज्यादा की टॉपलाइन ग्रोथ दिखाई। Zigly को FY27 में डी-मर्ज (अलग) करने की योजना है।
आगे का रास्ता और खतरे
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बढ़ने से रेवेन्यू ग्रोथ डबल डिजिट में बनी रहेगी। Q1 FY27 से अमेरिका के टैरिफ में कमी से कंपनी के अमेरिकी ऑपरेशंस को सालाना लगभग ₹50 करोड़ का फायदा होने की उम्मीद है।
हालांकि, कंपनी के मुख्य फिल्म बिजनेस में मुश्किलें बनी हुई हैं। BOPET फिल्म इंडस्ट्री में चीन से होने वाले इंपोर्ट पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी (एंटी-डंपिंग शुल्क) लगाने के लिए एक अर्जी दी गई है, जिस पर फैसला आने में 12-18 महीने लग सकते हैं। इसके अलावा, भारतीय BOPP फिल्म मार्केट में FY28 तक सप्लाई डिमांड से ज्यादा हो सकती है, जो भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए एक चुनौती पैदा कर सकता है।