Coromandel International: कमाई **26%** बढ़ी, पर मुनाफे में आई **4%** की गिरावट!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Coromandel International: कमाई **26%** बढ़ी, पर मुनाफे में आई **4%** की गिरावट!
Overview

Coromandel International ने Q3 FY26 के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले **26%** की शानदार छलांग लगाकर **₹8,863 करोड़** पर पहुंच गया। लेकिन, कच्चे माल की कीमतों में जबरदस्त उछाल और सब्सिडी कलेक्शन से जुड़ी चुनौतियों के चलते नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में **4%** की गिरावट आई है, जो **₹488 करोड़** रहा।

📈 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा

Coromandel International Limited ने Q3 FY26 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें टॉप-लाइन (कुल आय) में बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद बॉटम-लाइन (मुनाफे) पर कुछ दबाव देखा गया। कंपनी की कुल आय पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 26% बढ़कर ₹8,863 करोड़ हो गई। वहीं, नौ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह 33% बढ़कर ₹25,759 करोड़ पर पहुंच गई।

कॉन्सोलिडेटेड EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में 11.5% का स्वस्थ इजाफा हुआ, जो Q3 FY26 में ₹805 करोड़ रहा। नौ महीनों में यह 24.3% बढ़कर ₹2,738 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि, इन मजबूत ऑपरेशनल प्रदर्शनों के बावजूद, नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 4% की साल-दर-साल (YoY) गिरावट दर्ज की गई, जो Q3 FY26 में ₹488 करोड़ रहा। अच्छी बात यह है कि नौ महीनों के लिए PAT में 20.9% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹1,784 करोड़ पर पहुंच गया।

EBITDA और PAT में आए इस अंतर की वजह बढ़ती लागत या अन्य वित्तीय खर्चे हो सकते हैं, जो सीधे तौर पर नतीजों में नहीं दिख रहे। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि Q3 FY26 में सब्सिडी कलेक्शन ₹2,571 करोड़ रहा, लेकिन दिसंबर के अंत तक सब्सिडी आउटस्टैंडिंग (बकाया) बढ़कर ₹3,785 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के ₹2,095 करोड़ से काफी ज्यादा है। यह कंपनी की वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) पर दबाव का संकेत देता है।

🧐 मैनेजमेंट की राय और चुनौतियां

कंपनी के मैनेजमेंट ने स्वीकार किया है कि सल्फर (Sulphur) और फॉस्फोरिक एसिड (Phos Acid) जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल आया है, हालांकि उनका मानना है कि इनमें से कुछ उतार-चढ़ाव अल्पकालिक हो सकते हैं। फॉस्फेटिक फर्टिलाइजर (खाद) सेगमेंट में मार्केट शेयर में 15% से घटकर 14% होने की वजह किसी बड़ी समस्या के बजाय क्षेत्रीय स्तर पर मांग में आई सुस्ती को बताया गया।

निवेशकों का ध्यान सब्सिडियरीज़ के प्रदर्शन पर भी गया। खासकर NACL इंडस्ट्रीज़ को तिमाही के दौरान मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ा, भले ही उसने कर्ज कम करने के लिए राइट्स इश्यू पूरा कर लिया हो। वहीं, शुरुआती चरण की ड्रोन सब्सिडियरी, धक्ष (Dhaksha), सुधारात्मक कार्रवाईयों से गुजर रही है।

🚩 जोखिम और आगे की राह

बढ़ती सब्सिडी आउटस्टैंडिंग वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और कैश फ्लो के लिए एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। फर्टिलाइजर सेगमेंट के लिए कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता भी एक लगातार चुनौती है। NACL इंडस्ट्रीज़ से इंटीग्रेशन (समेकन) के लाभ Q1 FY27 से अपेक्षित हैं, जिसमें लागत दक्षता और प्रोडक्ट मिक्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

कंपनी की रणनीतिक पहलों में मैन्कोज़ेब (Mancozeb) की क्षमता को 30% तक बढ़ाना, पर्युफाइड फॉस्फोरिक एसिड प्रोजेक्ट्स विकसित करना और कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) के अवसरों का मूल्यांकन करना शामिल है। नैनो DAP (Nano DAP) बिजनेस के लिए ग्लोबल मार्केट में विस्तार की योजना है, जिसका लक्ष्य इस क्षेत्र में लीडरशिप हासिल करना है। डोमेस्टिक B2C फॉर्मूलेशन ग्रोथ को सालाना 20-25% पर अनुमानित किया गया है, जिसे नए उत्पादों और स्टोर विस्तार से सहारा मिलेगा।

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