Castrol India ने अपने नतीजे जारी कर दिए हैं और कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में ₹5,722 करोड़ का अपना अब तक का सबसे बड़ा रेवेन्यू हासिल किया है। यह पिछले साल की तुलना में 7% की जोरदार बढ़ोतरी है, जो कंपनी की मजबूत मांग और बेहतर बिजनेस स्ट्रेटेजी को दर्शाता है।
साल भर के आंकड़े और परफॉर्मेंस:
कंपनी का EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) ₹1,348 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 5% अधिक है। EBITDA मार्जिन लगभग 23.56% रहा, जो परिचालन दक्षता को दिखाता है। वहीं, PAT (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) ₹950 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल के ₹927 करोड़ से मामूली रूप से अधिक है। हालांकि, नए लेबर कोड के तहत ₹22.53 करोड़ की एक असाधारण देनदारी के कारण PAT पर कुछ असर पड़ा।
पूरे साल में वॉल्यूम ग्रोथ 8% रही, जिसमें ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल सेगमेंट दोनों का बड़ा योगदान रहा।
चौथी तिमाही (Q4 FY25) के नतीजे:
जनवरी से मार्च 2025 की चौथी तिमाही में, Castrol India का रेवेन्यू ₹1,440 करोड़ रहा, जो पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा है और पिछले साल की इसी तिमाही से 6% अधिक है। हालांकि, इसी तिमाही में EBITDA में 2% की मामूली गिरावट आई और यह ₹376 करोड़ रहा। पिछले तिमाही की तुलना में EBITDA में 14% की बढ़ोतरी देखी गई। चौथी तिमाही में वॉल्यूम ग्रोथ भी 8% रही।
कैश फ्लो और बैलेंस शीट पर नजर:
कंपनी ने FY25 में ₹1,090.14 करोड़ का मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो जेनरेट किया, जो PAT से काफी ज्यादा है।
बैलेंस शीट पर एक अहम बात यह है कि कंपनी की कुल इक्विटी पिछले साल के ₹2,278.37 करोड़ से घटकर ₹1,900.30 करोड़ हो गई है। इसका मुख्य कारण FY25 में किए गए बड़े डिविडेंड भुगतान हैं, जिसमें फाइनल डिविडेंड ₹5.25 प्रति शेयर भी शामिल है, जिसके चलते कुल ₹1,030 करोड़ का भुगतान हुआ।
फिक्स्ड एसेट्स में भी ₹61.98 करोड़ (पिछले साल ₹41.54 करोड़) का निवेश बढ़ा है। कंपनी के पास ₹426.62 करोड़ कैश और कैश इक्विवेलेंट्स के रूप में उपलब्ध हैं।
मैनेजमेंट का क्या कहना है:
कंपनी मैनेजमेंट के मुताबिक, FY25 वॉल्यूम-आधारित ग्रोथ और मार्केट शेयर में बढ़ोतरी का एक मजबूत साल रहा। इंडस्ट्रियल बिजनेस और रूरल डिस्ट्रीब्यूशन में डबल-डिजिट ग्रोथ प्रमुख रही। कंपनी ने ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल और स्पेशियलिटी सेगमेंट में लगभग 20 नए लोकल प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं और OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है।
आगे की राह और अनुमान:
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि भारतीय मोबिलिटी मार्केट धीरे-धीरे विकसित होता रहेगा, जिसमें ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और हाइब्रिड इंजन हावी रहेंगे। मैन्युफैक्चरिंग पहलों और कम प्रति व्यक्ति वाहन पैठ (low per capita vehicle penetration) के चलते इंडस्ट्रियल सेगमेंट में लुब्रिकेंट की मांग बनी रहने की उम्मीद है।
जोखिम:
मार्केट में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और करेंसी की चाल कंपनी के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।
रणनीतिक फोकस:
कंपनी अपने मुख्य बिजनेस को मजबूत करने, सप्लाई चेन को स्थानीय बनाने (localization) और नए सेगमेंट में विस्तार करने पर जोर दे रही है। 300 मिलियन से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुँचने के लिए ब्रांड कैंपेन चलाए गए और फास्टस्कैन मैकेनिक ऐप जैसे डिजिटल इनिशिएटिव्स का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 1 मिलियन से ज्यादा मैकेनिक रजिस्टर्ड हैं।
बड़ी खबर: ग्लोबल BP स्टेक सेल का असर?
एक बड़ी डेवलपमेंट यह है कि bp (ब्रिटिश पेट्रोलियम) ने Castrol के ग्लोबल लुब्रिकेंट्स बिजनेस में अपनी 65% हिस्सेदारी Stonepeak को बेचने के लिए एक समझौते पर सहमति जताई है। यह डील 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है और इसके लिए विभिन्न मंजूरियों की आवश्यकता होगी। यह Castrol India की पैरेंट कंपनी के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव है और भविष्य में इसके Castrol India पर असर डालने की संभावना है।