Bhagiradha Chemicals: नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
Bhagiradha Chemicals & Industries ने दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही (Q3FY26) और नौ महीनों (9MFY26) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने ईयर-ऑन-ईयर (YoY) आधार पर अच्छी ग्रोथ दिखाई है, लेकिन क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर (QoQ) प्रदर्शन में गिरावट चिंता बढ़ा रही है।
तिमाही नतीजों पर एक नज़र:
Q3FY26 में क्या रहा खास: इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹114 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि नेट प्रॉफिट (PAT) 28% की शानदार बढ़ोतरी के साथ ₹4.6 करोड़ रहा। वहीं, ईबीटा (EBITDA) में 49% का उछाल आकर यह ₹13.7 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के ग्रॉस मार्जिन में भी 311 बेसिस पॉइंट की बढ़त देखी गई, जिससे ईबीटा मार्जिन 12.0% हो गया।
QoQ में आई गिरावट: हालांकि, पिछले क्वार्टर (Q2FY26) के मुकाबले Q3FY26 में रेवेन्यू में 19% की भारी गिरावट आई, जो ₹140.1 करोड़ से घटकर ₹114 करोड़ पर आ गया। ईबीटा और नेट प्रॉफिट में भी क्रमशः 9% और 16% की कमी आई। कंपनी का कहना है कि यह गिरावट मौसमी (Seasonality) उतार-चढ़ाव के कारण है।
9MFY26 का प्रदर्शन: फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों (9MFY26) में रेवेन्यू 19% बढ़कर ₹377.8 करोड़ हो गया, और ईबीटा 22% बढ़कर ₹37.7 करोड़ रहा। लेकिन, नेट प्रॉफिट 4% घटकर ₹14.1 करोड़ पर आ गया।
FY25 की स्थिति: पिछले पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी का रेवेन्यू ₹441 करोड़ था, लेकिन ईबीटा मार्जिन 3.1% और नेट प्रॉफिट मार्जिन भी 3.1% रहा, जो कि बाज़ार की मुश्किल परिस्थितियों के कारण था।
₹800 करोड़ का बड़ा एक्सपेंशन और भविष्य की रणनीति
कंपनी अपनी सब्सिडियरी Bheema Fine Chemicals के माध्यम से एक महत्वाकांक्षी ₹800 करोड़ का विस्तार (Expansion) प्लान चला रही है। इसमें फेज 1B के लिए ₹346 करोड़ (जो Q3 FY26 में शुरू हुआ) और फेज 2 के लिए ₹350 करोड़ (FY28 की दूसरी तिमाही तक अपेक्षित) का निवेश शामिल है। इस फंड का इंतजाम लोन को इक्विटी में बदलने और ₹340 करोड़ के प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू के जरिए किया जा रहा है। मैनेजमेंट का लक्ष्य अगले 6 से 7 सालों में कंपनी के रेवेन्यू को पांच गुना बढ़ाना है। हाल ही में एक नए हर्बीसाइड प्रोडक्ट को लॉन्च करना और सोलर प्लांट की शुरुआत करना कुछ सकारात्मक कदम हैं।
चिंताएं और आगे की राह
Working Capital का बढ़ता बोझ: सबसे बड़ी चिंता वर्किंग कैपिटल डेज़ (Working Capital Days) में भारी बढ़ोतरी है, जो FY22 में 99 दिनों से बढ़कर FY25 में 170 दिनों तक पहुंच गई है। यह नकदी (Liquidity) पर भारी दबाव का संकेत देता है।
ROCE और ROE में गिरावट: कंपनी के रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) में FY21 के 18% से गिरकर FY25 में 3% हो गया है। इसी तरह, रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 15.0% से गिरकर 2.0% रह गया है। मैनेजमेंट इसे सब्सिडियरी में लगे फंड्स का असर बता रहा है।
एक्सपेंशन रिस्क: ₹800 करोड़ के इतने बड़े विस्तार प्लान में एग्जीक्यूशन, लागत बढ़ने या देरी का जोखिम बना हुआ है।
निवेशकों की नज़रें अब Bheema फैसिलिटी के सफल लॉन्च पर रहेंगी, जिससे कंपनी को ग्रोथ और बेहतर मार्जिन मिलने की उम्मीद है। वर्किंग कैपिटल का कुशल प्रबंधन और एक्सपेंशन प्लान का समय पर और बजट के अंदर पूरा होना कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।