NSE से मिली इस मंजूरी से BASF India के कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (Corporate Restructuring) प्लान को बड़ी राहत मिली है। कंपनी को 2 फरवरी, 2026 को NSE से एक 'ऑब्ज़र्वेशन लेटर' प्राप्त हुआ है, जिसमें एग्री बिज़नेस को उसकी 100% मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी BASF Agricultural Solutions India Limited (BASIL) में डीमर्ज करने की ड्राफ्ट स्कीम के लिए 'नो ऑब्जेक्शन' कहा गया है।
यह कदम ऐसे समय आया है जब BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) से भी पहले ही ऐसी ही 'नो ऑब्जेक्शन' क्लीयरेंस मिल चुकी है। इस डीमर्जर का मुख्य उद्देश्य दो अलग-अलग और फोकस्ड बिज़नेस एंटिटीज़ बनाना है, जिससे हर एक को अपने मार्केट सेगमेंट में ज़्यादा बेहतर ग्रोथ स्ट्रेटेजी अपनाने और वैल्यू अनलॉक करने का मौका मिल सके।
हालांकि, यह पूरी स्कीम अभी भी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और अन्य ज़रूरी रेगुलेटरी अथॉरिटीज से अप्रूवल मिलने पर निर्भर है। NSE के 'ऑब्ज़र्वेशन लेटर' में कई सख्त शर्तें और एक्सटेंसिव डिस्क्लोज़र (Disclosure) की ज़रूरतें बताई गई हैं। इनमें पब्लिक शेयरहोल्डर्स को डीमर्जर की वजहों और फाइनेंशियल असर के बारे में बताना, यह सुनिश्चित करना कि वैल्यूएशन रिपोर्ट के लिए फाइनेंशियल डेटा छह महीने से ज़्यादा पुराना न हो, क्रेडिटर्स (लेनदारों) की सहमति लेना, और यह भी कि BASIL के सभी प्रस्तावित इक्विटी शेयर्स (Equity Shares) डीमैट फॉर्म (Demat Form) में ही इश्यू किए जाएंगे। NSE ने यह भी एक समय-सीमा तय की है कि NCLT के ऑर्डर आने के 60 दिनों के अंदर BASIL की सिक्योरिटीज (Securities) की लिस्टिंग (Listing) शुरू हो जानी चाहिए।
इस अनाउंसमेंट में किसी खास तिमाही या सालाना फाइनेंशियल रिजल्ट्स, प्रॉफिट या अर्निंग्स पर शेयर (EPS) जैसे आंकड़ों का ज़िक्र नहीं किया गया था, क्योंकि फोकस मुख्य रूप से कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग की रेगुलेटरी प्रक्रिया पर था। BASF India और BASIL, दोनों की भविष्य की सफलता और परफॉरमेंस सभी रेगुलेटरी अप्रूवल के समय पर पूरा होने और डीमर्जर के बाद उनकी एग्जीक्यूशन कैपेबिलिटीज (Execution Capabilities) पर ही निर्भर करेगी।