Andhra Petro Share Price: बड़ा झटका! ₹10.77 Cr का Q3 Loss, प्लांट शटडाउन और VPA विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें

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AuthorAditya Rao|Published at:
Andhra Petro Share Price: बड़ा झटका! ₹10.77 Cr का Q3 Loss, प्लांट शटडाउन और VPA विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
Overview

Andhra Petro Chemicals Limited (Andhra Petro) के निवेशकों के लिए तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे चिंताजनक रहे। कंपनी ने **₹10.77 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल इसी अवधि में हुए **₹2.14 करोड़** के मुनाफे (Profit) से एक बड़ा उलटफेर है। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी **45.9%** की भारी गिरावट के साथ **₹67.39 करोड़** पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह मेनटेनेंस के लिए तीन महीने तक चला प्लांट शटडाउन और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) के साथ जमीन लीज को लेकर चल रहा विवाद बताया जा रहा है।

📉 नतीजों का विश्लेषण (The Financial Deep Dive)

Andhra Petro की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के आंकड़े कंपनी के लिए मुश्किलों को दर्शाते हैं।

  • परिचालन पर असर: कंपनी को इस तिमाही में ₹10.77 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹2.14 करोड़ का मुनाफा (Profit) दर्ज किया गया था।

  • रेवेन्यू में गिरावट: कंपनी का रेवेन्यू 45.9% गिरकर ₹67.39 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹124.53 करोड़ था।

  • कुल आय और खर्च: तीसरी तिमाही में कुल आय ₹73.29 करोड़ रही, जो पिछले साल ₹131.43 करोड़ थी। वहीं, कुल एक्सपेंस (Expenses) ₹85.05 करोड़ रहे, जो आय से ज़्यादा थे।

  • टैक्स से पहले का नुकसान: टैक्स से पहले का नुकसान (Loss Before Tax) ₹11.76 करोड़ रहा।

  • 9 महीने के नतीजे: फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले 9 महीनों (9M FY26) में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹17.05 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹2.88 करोड़ का लॉस था। हालांकि, 9M FY26 में रेवेन्यू 5.04% बढ़कर ₹376.49 करोड़ रहा।

  • EPS में गिरावट: प्रति शेयर आय (EPS) (₹1.27) रही, जो पिछले साल ₹0.25 थी।

🚩 आगे की राह और चुनौतियाँ (Risks & Outlook)

कंपनी के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हैं:

  • बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियाँ: कम बिक्री मूल्य (Sales Price) और बढ़ी हुई इनपुट लागत (Input Cost) के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव है।

  • प्लांट शटडाउन का प्रभाव: 29 अक्टूबर 2025 से 27 जनवरी 2026 तक तीन महीने तक चले प्लांट शटडाउन का प्रोडक्शन और रेवेन्यू पर गहरा असर पड़ा।

  • VPA के साथ विवाद: विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) के साथ जमीन लीज के रिन्यूअल को लेकर चल रहा कानूनी मामला, कंपनी की भविष्य की ऑपरेशंस के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है।

  • वित्तीय स्थिति: लगातार आ रहा नकारात्मक EPS और बड़े नेट लॉस कंपनी की ओवरऑल फाइनेंशियल हेल्थ पर सवाल खड़े करते हैं।
निवेशकों को अब कंपनी के शटडाउन के बाद प्रोडक्शन को सामान्य करने की क्षमता, बाजार की मुश्किलों से निपटने की रणनीति और VPA के साथ जमीन लीज विवाद के समाधान पर बारीकी से नजर रखनी होगी। अगले 1-2 तिमाहियों में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में वापसी ही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा वॉचपॉइंट (watchpoint) रहेगी।

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