📉 नतीजों का विश्लेषण (The Financial Deep Dive)
Andhra Petro की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के आंकड़े कंपनी के लिए मुश्किलों को दर्शाते हैं।
- परिचालन पर असर: कंपनी को इस तिमाही में ₹10.77 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹2.14 करोड़ का मुनाफा (Profit) दर्ज किया गया था।
- रेवेन्यू में गिरावट: कंपनी का रेवेन्यू 45.9% गिरकर ₹67.39 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹124.53 करोड़ था।
- कुल आय और खर्च: तीसरी तिमाही में कुल आय ₹73.29 करोड़ रही, जो पिछले साल ₹131.43 करोड़ थी। वहीं, कुल एक्सपेंस (Expenses) ₹85.05 करोड़ रहे, जो आय से ज़्यादा थे।
- टैक्स से पहले का नुकसान: टैक्स से पहले का नुकसान (Loss Before Tax) ₹11.76 करोड़ रहा।
- 9 महीने के नतीजे: फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले 9 महीनों (9M FY26) में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹17.05 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹2.88 करोड़ का लॉस था। हालांकि, 9M FY26 में रेवेन्यू 5.04% बढ़कर ₹376.49 करोड़ रहा।
- EPS में गिरावट: प्रति शेयर आय (EPS) (₹1.27) रही, जो पिछले साल ₹0.25 थी।
🚩 आगे की राह और चुनौतियाँ (Risks & Outlook)
कंपनी के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हैं:
- बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियाँ: कम बिक्री मूल्य (Sales Price) और बढ़ी हुई इनपुट लागत (Input Cost) के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव है।
- प्लांट शटडाउन का प्रभाव: 29 अक्टूबर 2025 से 27 जनवरी 2026 तक तीन महीने तक चले प्लांट शटडाउन का प्रोडक्शन और रेवेन्यू पर गहरा असर पड़ा।
- VPA के साथ विवाद: विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) के साथ जमीन लीज के रिन्यूअल को लेकर चल रहा कानूनी मामला, कंपनी की भविष्य की ऑपरेशंस के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
- वित्तीय स्थिति: लगातार आ रहा नकारात्मक EPS और बड़े नेट लॉस कंपनी की ओवरऑल फाइनेंशियल हेल्थ पर सवाल खड़े करते हैं।
