JSW के इरादे बुलंद: AkzoNobel India की नई राह
JSW ग्रुप के अधिग्रहण के बाद AkzoNobel India की Q3 FY26 की परफॉरमेंस मिली-जुली रही। कुल रेवेन्यू पिछले साल की समान तिमाही (YoY) की तुलना में 1% घटकर ₹907.7 करोड़ रहा।
हालांकि, कंपनी के घरेलू कारोबार ने अच्छी पकड़ बनाए रखी, जिसमें करीब 2% की ग्रोथ दर्ज की गई। खास तौर पर, डेकोरेटिव पेंट्स की वॉल्यूम में 8% का शानदार उछाल देखा गया। एक्सेप्शनल आइटम्स (जैसे लेबर कोड से जुड़े खर्च) को छोड़ दें तो, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 5.9% का इजाफा हुआ। ग्रॉस मार्जिन में भी सीक्वेंशियल सुधार देखा गया, जो बेहतर प्राइसिंग और कॉस्ट मैनेजमेंट का संकेत है। बता दें कि डिवेस्ट किए गए (बेचे गए) बिजनेसेस का कुल रेवेन्यू पर करीब ₹200 करोड़ का असर पड़ा। साथ ही, पिछले साल कोटिंग्स सेगमेंट में हाई बेस होने का भी तुलनात्मक परफॉरमेंस पर असर पड़ा।
मार्केट लीडरशिप का बड़ा प्लान
JSW ग्रुप के नेतृत्व में, कंपनी ने मार्केट शेयर में बड़ी सेंध लगाने की स्पष्ट मंशा जताई है। मैनेजमेंट का टारगेट है कि अगले 3-4 सालों में पेंट सेगमेंट में टॉप #2/#3 और कोटिंग्स में टॉप #1/#2 पायदान हासिल कर लिया जाए। इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए स्ट्रेटेजिक प्राइसिंग एडजस्टमेंट और कोटिंग्स के मिड-मार्केट सेगमेंट में एंट्री जैसे कदम उठाए जाएंगे।
वित्तीय मजबूती और आगे की राह
एक बड़ी वित्तीय राहत यह है कि डुलक्स (Dulux) ब्रांड के लिए रॉयल्टी पेमेंट बंद होने से कंपनी को हर साल करीब ₹60-65 करोड़ की बचत होने का अनुमान है। इस बचत का इस्तेमाल ग्रोथ पहलों में किया जाएगा। कंपनी के पास कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) और विस्तार के लिए ₹200-225 करोड़ का फ्री कैश उपलब्ध है।
आने वाले 2-3 तिमाहियों में नए मार्केट एंट्रेंट्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीद है, जो एक बड़ी चुनौती पेश करेगी। मैनेजमेंट ने शुरुआती तौर पर ईबीआईटीडीए (EBITDA) मार्जिन के लिए 14.5-15% का लक्ष्य रखा है, और मध्य अवधि में इसे 15-16% तक ले जाने की मंशा है।