Agro Chem Federation of India ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार के सामने **₹7,500 करोड़** के सपोर्ट प्लान का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का मकसद चीन से होने वाले इम्पोर्ट पर निर्भरता को कम करना है।
आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम
ACFI ने सरकार से जो ₹7,500 करोड़ का सपोर्ट प्रोग्राम मांगा है, उसका मुख्य लक्ष्य एग्रोकेमिकल टेक्निकल और इंटरमीडिएट्स का देश में ही निर्माण करना है। फिलहाल, इन कच्चे मालों के लिए भारत का बड़ा हिस्सा चीन पर टिका है। यदि यह योजना पास होती है, तो इंडस्ट्री 'फॉर्मूलेशन हब' की छवि से बाहर निकलकर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर बढ़ेगी।
क्या है योजना?
प्रस्ताव के मुताबिक, यह स्कीम 7 से 8 साल तक चलेगी, जिसमें कंपनियों को सेल्स में बढ़ोतरी पर 5-8% तक का इंसेंटिव (Incentive) देने की बात कही गई है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल बिजली और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए भी ग्रांट की मांग की गई है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
PI Industries, UPL, और Dhanuka Agritech जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह गेम-चेंजर साबित हो सकता है। फिलहाल ये कंपनियां मार्जिन प्रेशर झेल रही हैं क्योंकि सस्ते चीनी माल के आगे प्रतिस्पर्धा कठिन है। अगर सरकार की ओर से सपोर्ट मिलता है, तो कंपनियों की इनपुट कॉस्ट घट सकती है और सप्लाई चेन मजबूत होगी।
हालांकि, अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। सब्सिडी का फायदा तभी मिलेगा जब सरकार इसे मंजूरी देगी और पॉलिसी की बारीकियां स्पष्ट होंगी। निवेशकों को सलाह है कि वे फिलहाल कच्चे माल की कीमतों के ट्रेंड पर नज़र रखें और कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को ट्रैक करते रहें।
