Agro Chem Federation of India ने सरकार के सामने **₹7,000 करोड़** का एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य मकसद चीन से आने वाले रॉ मटेरियल पर निर्भरता को कम करना और देश में ही टेक्निकल-ग्रेड केमिकल्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है।
Agro Chem Federation of India ने सरकार से ₹5,000 करोड़ से ₹7,000 करोड़ की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य देश में उन टेक्निकल-ग्रेड एग्रोकेमिकल्स का उत्पादन बढ़ाना है, जिनके लिए भारत अभी भी काफी हद तक चीन पर निर्भर है।
इंसेटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
इस 7 से 8 साल के प्लान में सरकार से 5-8% तक सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव देने की मांग की गई है। इसके अलावा, बिजली के खर्च और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 30-40% सब्सिडी का सुझाव दिया गया है। इंडस्ट्री का मानना है कि बिजली की ऊंची कीमतें और बिखरा हुआ मैन्युफैक्चरिंग बेस कंपनियों को बड़ी मुश्किलों में डालता है। साथ ही, एग्रोकेमिकल पार्क्स बनाने और सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने की भी मांग की गई है।
बायोलॉजिकल्स की ओर कदम
केमिकल मैन्युफैक्चरिंग के अलावा, अब इंडस्ट्री बायोलॉजिकल क्रॉप-प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स पर भी बड़ा दांव लगा रही है। इसके लिए पायलट-स्केल फैसिलिटीज और गुड-लैबोरेटरी-प्रैक्टिस (GLP) लैब्स बनाने के लिए फंड मांगा गया है, ताकि वैश्विक मानकों के हिसाब से क्वालिटी को टेस्ट किया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शेयरहोल्डर्स के लिए यह एक स्ट्रैटेजिक बदलाव है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कंपनियों के मार्जिन में स्थिरता आ सकती है और सप्लाई चेन का रिस्क कम होगा। हालांकि, जानकारों का मानना है कि केवल सरकारी ग्रांट काफी नहीं होगी; कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी और स्केल को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना होगा। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है और इंप्लीमेंटेशन में कितना समय लगता है, क्योंकि लॉन्ग टर्म में यही कंपनी के बैलेंस शीट पर असर डालेगा।
