कंपनी के नतीजे और वित्तीय प्रदर्शन
कंपनी के नतीजों पर नज़र डालें तो, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) 44.7% की भारी बढ़ोतरी के साथ ₹317.12 करोड़ पर पहुँच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹219.08 करोड़ था। प्रॉफिट (Profit) में भी 48.6% का इजाफा देखा गया, जो ₹64.48 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹43.39 करोड़ था।
नौ महीनों (9M FY26) में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 42.6% बढ़कर ₹853.36 करोड़ और प्रॉफिट 53.0% बढ़कर ₹165.46 करोड़ हुआ।
वहीं, स्टैंडअलोन (Standalone) प्रदर्शन की बात करें तो, तीसरी तिमाही में रेवेन्यू 30.3% बढ़कर ₹257.14 करोड़ और प्रॉफिट 27.2% बढ़कर ₹51.96 करोड़ रहा। नौ महीनों (9M FY26) के लिए स्टैंडअलोन रेवेन्यू 22.2% बढ़कर ₹701.19 करोड़ और प्रॉफिट 24.3% बढ़कर ₹135.67 करोड़ रहा।
इस तिमाही में ₹2.34 करोड़ की असाधारण मदें (Exceptional Items) भी दर्ज की गईं।
ऑडिटर की रिपोर्ट और अहम चिंताएं
हालांकि, निवेशकों को एक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान देना होगा। कंपनी के ऑडिटर (Auditor) ने अपनी रिपोर्ट में एक Q3 FY24 में सचिन, सूरत स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में हुई आग की घटना का जिक्र किया है। कंपनी अभी भी इस आग से हुए फिक्स्ड एसेट (Fixed Asset) के नुकसान और उसके वित्तीय असर का आकलन कर रही है। फिलहाल, इस नुकसान को नतीजों में शामिल नहीं किया गया है।
इसके अलावा, ऑडिटर ने नए लेबर कोड (Labour Code) के कारण ₹1.16 करोड़ की अतिरिक्त ग्रेच्युटी लायबिलिटी (Gratuity Liability) का भी उल्लेख किया है, जिसे कंपनी ने नतीजों में दर्ज कर लिया है।
जोखिम और आगे का नज़रिया
सबसे बड़ा जोखिम फिलहाल आग की घटना से हुए वित्तीय नुकसान का आकलन पूरा न होना है। इससे भविष्य में कंपनी की बैलेंस शीट (Balance Sheet) और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर असर पड़ सकता है।
आगे चलकर, निवेशकों को आग की घटना के अंतिम आकलन पर पैनी नज़र रखनी होगी। वहीं, कंपनी के प्रोडक्ट की मांग मजबूत बनी हुई है, जो भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।