एनालिस्ट का भरोसा: Zomato की ग्रोथ पर दांव
HDFC Securities ने Zomato को 'Buy' रेटिंग दी है, जिसकी मुख्य वजह फूड डिलीवरी बिजनेस में सुधरते रुझान और क्विक कॉमर्स (Blinkit) के ज़रिए मार्केट शेयर में हो रही बढ़ोतरी है। फर्म को उम्मीद है कि फूड डिलीवरी में मंथली यूज़र्स 20% बढ़ेंगे और ऑर्डर वॉल्यूम में 24% की बढ़ोतरी होगी, जबकि नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में 18% सालाना बढ़ोतरी देखी जाएगी। इस ग्रोथ का एक बड़ा श्रेय 'गोल्ड' मेंबरशिप प्रोग्राम को भी जाता है, जिसे Q2 FY26 में लॉन्च किया गया था और इससे यूज़र साइन-अप और इंगेजमेंट में बढ़ोतरी की उम्मीद है। हाल ही में LPG की किल्लत के कारण मेन्यू पर कुछ पाबंदियां लगीं, लेकिन वॉल्यूम पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। हालांकि, HDFC Securities ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर वॉल्यूम बनाए रखने के लिए डिलीवरी रेडियस बढ़ाना पड़ा, तो डिलीवरी कॉस्ट बढ़ सकती है। इसके जवाब में कंपनियों ने प्लेटफॉर्म फीस 17-19% बढ़ाई है और डिस्काउंट सेल्स के लिए मिनिमम ऑर्डर वैल्यू में भी इज़ाफ़ा किया है।
क्विक कॉमर्स में Blinkit का दबदबा
क्विक कॉमर्स सेक्टर में, Blinkit अपनी मार्केट शेयर बढ़ाने की राह पर है, जबकि दूसरे कंपटीटर प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। Blinkit को Zomato की मजबूत सप्लाई चेन और प्रॉफिट व ग्रोथ पर फोकस का फायदा मिल रहा है। एनालिस्टों का अनुमान है कि Q4 में नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में 10% क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर ग्रोथ दिखेगी, जो 250 नए डार्क स्टोर्स और लगातार डेली ऑर्डर्स से संभव होगा। यह बिजनेस प्रॉफिटेबिलिटी के करीब पहुंच रहा है। भारत में क्विक कॉमर्स मार्केट एक बड़ा ग्रोथ एरिया है, जिसके $3.65 बिलियन (2026) से बढ़कर $6.64 बिलियन (2031) तक पहुंचने का अनुमान है। सितंबर 2025 तक Blinkit की मार्केट शेयर 50% से अधिक थी, जिसने Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया।
वैल्यूएशन और शेयर प्रदर्शन
1 अप्रैल 2026 को Zomato का शेयर लगभग ₹236.50 के भाव पर ट्रेड कर रहा था। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹228,425 करोड़ है। हालांकि, इसका वैल्यूएशन काफी महंगा लग रहा है, जिसमें दिसंबर 2025 तक की कमाई के आधार पर प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 988.85 है। यह हाई P/E रेश्यो बताता है कि निवेशकों को कंपनी से जबरदस्त फ्यूचर ग्रोथ की उम्मीद है। पिछले एक साल में शेयर में करीब 9.2% की बढ़ोतरी हुई है। हाल के हफ्तों में 0.5% की गिरावट पिछले हफ्ते और 3.9% की गिरावट पिछले महीने इस अपग्रेड के बावजूद सावधानी का संकेत देती है।
मार्केट शेयर और सेक्टर की चाल
फूड डिलीवरी में Zomato की मार्केट शेयर 55-58% अनुमानित है, जबकि Swiggy 42-45% पर है। Blinkit का क्विक कॉमर्स में दबदबा (50% से अधिक मार्केट शेयर सितंबर 2025 तक) इसके स्ट्रैटेजिक एग्जीक्यूशन को दर्शाता है। Zomato का FY25 रेवेन्यू ₹20,243 करोड़ था, जो पिछले साल की तुलना में 67% ज्यादा है, और नेट प्रॉफिट ₹527 करोड़ रहा। क्विक कॉमर्स सेक्टर 2030 तक $25 बिलियन से ज्यादा का हो सकता है, जिसमें भारत के पैक्ड फूड मार्केट का 15-20% हिस्सा शामिल होगा। शुरुआती 2025 की कुछ एनालिस्ट रिपोर्ट्स में क्विक कॉमर्स की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और Q3 FY25 में नेट प्रॉफिट में 57.2% की गिरावट के कारण डाउनग्रेड्स देखे गए थे। हालांकि, अप्रैल 2026 की हालिया कमेंट्री में ICICI Securities जैसी एनालिस्ट फर्मों ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है।
मुख्य रिस्क और चिंताएं
'Buy' रेटिंग के बावजूद, कुछ चिंताएं उम्मीदों पर पानी फेर सकती हैं। कंपनी का 988.85 का P/E रेश्यो बताता है कि ग्रोथ की उम्मीदें पूरी करना मार्जिन को नुकसान पहुंचाए बिना मुश्किल हो सकता है। HDFC Securities ने FY27 और FY28 के लिए EBITDA अनुमानों को बढ़ाया है, लेकिन फूड डिलीवरी में बढ़ती डिलीवरी लागत एक तात्कालिक खतरा हो सकती है। क्विक कॉमर्स सेक्टर में Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है। Zomato का Q4 FY25 का मुनाफा रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद साल-दर-साल 77.7% घटकर ₹39 करोड़ रह गया, जो अस्थिर प्रॉफिटेबिलिटी को दिखाता है। हाई डेट टू EBITDA रेश्यो कर्ज चुकाने को लेकर चिंताएं बढ़ाता है। विदेशी निवेशकों ने दिसंबर 2024 में अपनी हिस्सेदारी कम की, जो सेंटिमेंट में बदलाव का संकेत है। अपने बड़े स्टोर नेटवर्क और डिलीवरी स्टाफ का प्रबंधन, लगातार निवेश के साथ, प्रॉफिटेबिलिटी में बाधा डाल सकता है।
एनालिस्ट का आउटलुक और वैल्यूएशन टारगेट
HDFC Securities ने अपने टारगेट प्राइस को ₹340 प्रति शेयर पर बरकरार रखा है, जो तत्काल बड़ी अपसाइड की संभावना को सीमित करता है। भविष्य में, फूड डिलीवरी की ग्रोथ लंबी अवधि में 18-20% रहने का अनुमान है। Blinkit 3,000 स्टोर्स तक पहुंच सकता है और मार्जिन में लगभग 1% का सुधार कर सकता है। हाल के Q3 FY26 नतीजों में ₹16,315 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹102 करोड़ का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या ग्रोथ लागत और प्रतिस्पर्धा को मात देकर मौजूदा स्टॉक प्राइस को सही ठहरा पाएगी।