Profit बढ़ने के बाद भी क्यों गिर जाते हैं Shares? समझें Valuation De-rating का खेल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Profit बढ़ने के बाद भी क्यों गिर जाते हैं Shares? समझें Valuation De-rating का खेल

मुनाफे में दमदार ग्रोथ का मतलब हमेशा शेयर में तेजी नहीं होता। Carnelian Capital की एक स्टडी बताती है कि BSE 500 की **40%** कंपनियों के साथ ऐसा हुआ है जहां प्रॉफिट तो बढ़ा, लेकिन महंगे वैल्युएशन के कारण निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।

अक्सर निवेशक केवल कंपनी के प्रॉफिट ग्रोथ को देखकर पैसा लगा देते हैं, लेकिन शेयर मार्केट में कमाई सिर्फ मुनाफे पर निर्भर नहीं करती। अगर आपने किसी शेयर को बहुत महंगे दाम पर खरीदा है, तो कंपनी के मुनाफा दोगुना होने पर भी आपको नुकसान हो सकता है। इसे 'वैल्युएशन डी-रेटिंग' (Valuation De-rating) कहते हैं, जहाँ मार्केट कंपनी की कमाई के मुकाबले उसे कम भाव देने लगता है।

वैल्युएशन डी-रेटिंग का गणित

Carnelian Capital की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच BSE 500 की करीब 40% कंपनियों की वैल्युएशन में कम से कम 5% की गिरावट आई। हैरानी की बात यह है कि इन कंपनियों का प्रॉफिट हर साल औसतन 15% बढ़ रहा था, लेकिन मार्केट वैल्यू में सिर्फ 10% का उछाल आया। बाकी का हिस्सा P/E रेशियो के सिकुड़ने (Contraction) में खत्म हो गया। जब निवेशक शेयर के लिए प्रीमियम देते हैं, तो वे भविष्य की बहुत ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद कर रहे होते हैं। अगर वो ग्रोथ थोड़ी भी कम हुई, तो वैल्युएशन ताश के पत्तों की तरह गिर जाते हैं।

क्यों हाई-ग्रोथ स्टॉक्स भी अटक जाते हैं?

कई बार मजबूत बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां भी इसका शिकार होती हैं। उदाहरण के तौर पर Aptus Value Housing Finance को देखें, जहाँ 2021 से 2026 के बीच मुनाफा बढ़ा लेकिन शेयर ने निवेशकों को निराश किया, क्योंकि उसकी लिस्टिंग के समय ही भविष्य की बहुत ज्यादा उम्मीदें जुड़ी थीं। यही हाल HDFC Bank का 2019 से 2026 के बीच रहा, जहाँ 20% की सालाना ग्रोथ के बावजूद वैल्युएशन मल्टीपल कम होने से शेयर भाव पर दबाव रहा।

गिरावट की मुख्य वजहें

वैल्युएशन गिरने के पीछे कई ट्रिगर्स होते हैं:

  • कंपटीशन में बदलाव: जैसे Reliance Jio के आने से टेलिकॉम सेक्टर में कंपनियों की कमाई के अनुमान बदल गए।
  • ग्लोबल डिमांड: स्पेशलिटी केमिकल कंपनियों के साथ हुआ, जब डिमांड कम हुई और चाइना से सप्लाई चेन के मुद्दे सुलझे।
  • रेगुलेटरी बदलाव: Indian Energy Exchange जैसे मामलों में सरकारी पॉलिसी की अनिश्चितता ने ग्रोथ पर असर डाला।

निवेश कैसे करें?

सिर्फ प्रॉफिट ग्रोथ न देखें, PEG रेशियो और अर्निंग यील्ड जैसे मेट्रिक्स का इस्तेमाल करें। अगर PEG रेशियो बहुत ज्यादा है, तो शेयर ओवरप्राइस्ड हो सकता है। हमेशा यह देखें कि क्या कंपनी का कंपीटिटिव एडवांटेज और मार्जिन सच में बढ़ रहे हैं, या स्टॉक प्राइस सिर्फ मार्केट की हाइप पर चढ़ा हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.