Waterfield Advisors के विपुल भौवार ने डिफेंस, रेलवे और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में बढ़ते वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने IT सेक्टर में नए कॉन्ट्रैक्ट्स पर नजर रखने और गोल्ड-सिल्वर पर लंबी अवधि के लिए सकारात्मक रुख बनाए रखने की बात कही है।
वैल्यूएशन की चिंता और सावधानी
बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच, Waterfield Advisors के हेड ऑफ इक्विटीज, विपुल भौवार ने निवेशकों को संयम बरतने की सलाह दी है। उनका मानना है कि मिड-कैप डिफेंस, रेलवे और एफएमसीजी (FMCG) जैसे सेक्टरों में शेयर अब अपने पीक पर हैं और इनका पीई मल्टीपल 60 से 80 के स्तर पर पहुंच चुका है। इतनी महंगी वैल्यूएशन पर मामूली गिरावट भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए निवेशकों को बिना सोचे-समझे मोमेंटम के पीछे नहीं भागना चाहिए।
IT सेक्टर: उम्मीद से ज्यादा जरूरी है 'डेटा'
IT सेक्टर को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ उम्मीदों के दम पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी रिकवरी के लिए कंपनियों के टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) में स्पष्ट बढ़ोतरी दिखनी जरूरी है। जब तक कंपनियां छोटे प्रोजेक्ट्स के बजाय बड़े और हाई-वैल्यू कॉन्ट्रैक्ट्स नहीं हासिल करतीं, तब तक इस सेक्टर में आक्रामक दांव लगाना जल्दबाजी होगी।
गोल्ड और सिल्वर की अलग कहानी
इक्विटी के विपरीत, कीमती धातुओं के लिए नजरिया अलग है। गोल्ड को पोर्टफोलियो के लिए एक बेहतरीन 'हेज' माना जा रहा है, जिसे सेंट्रल बैंक की खरीदारी का समर्थन मिल रहा है। वहीं, सिल्वर का मामला थोड़ा अलग है। इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग—खासकर एआई (AI), ईवी (EV) बैटरी और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में—और सप्लाई में कमी के कारण इसमें लंबे समय के लिए एक मजबूत स्ट्रक्चरल कहानी बन रही है।
बाजार की अस्थिरता में क्या करें?
विपुल भौवार के अनुसार, भारतीय बाजार की नींव मजबूत है। यदि वैश्विक सेंटीमेंट या किसी पैनिक के कारण बाजार में गिरावट आती है, तो इसे क्वालिटी स्टॉक्स खरीदने का मौका मानना चाहिए। इन्वेस्टर को उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनका बिजनेस मॉडल नॉन-साइक्लिकल है और जिन्हें सरकार का सीधा समर्थन प्राप्त है, जैसे कि इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर।
