ब्रोकरेज हाउस Prabhudas Lilladher ने Waaree Energies पर कवरेज शुरू की है। कंपनी अब सोलर मॉड्यूल के साथ-साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज (BESS) और इनवर्टर प्रोडक्शन में तेजी से विस्तार कर रही है, जिससे 2029 तक ग्रोथ की मजबूत उम्मीद है।
विविधीकरण (Diversification) पर जोर
Waaree Energies अब अपनी पारंपरिक सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग से आगे निकलकर नए क्षेत्रों में कदम रख रही है। ब्रोकरेज की रिपोर्ट के अनुसार, बैटरी एनर्जी स्टोरेज और इनवर्टर टेक्नोलॉजी भविष्य में कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।
नई मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं
कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं:
- बैटरी स्टोरेज: जुलाई 2026 से 5.15 गीगावाट-घंटे (GWh) क्षमता वाली नई फैसिलिटी काम कर रही है।
- सेल मैन्युफैक्चरिंग: 4 गीगावाट क्षमता वाला सेल मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है, जिससे कंपनी की निर्भरता बाहरी सप्लायर्स पर कम होगी।
- इनवर्टर प्रोडक्शन: फिलहाल 4 गीगावाट क्षमता है, जिसमें से करीब 58% का उपयोग हो रहा है। प्रबंधन ने दिसंबर 2026 तक 5,000 यूनिट्स मैन्युफैक्चर करने का टारगेट रखा है।
- सब्सिडियरी: Waaree Power अब ऑटोमोटिव, डिफेंस और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली में भी उतर रही है।
ग्रोथ का गणित और चुनौतियां
ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से 2029 के बीच कंपनी की रेवेन्यू में 22.5%, ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 16.4% और नेट प्रॉफिट में 8.9% की सालाना ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
हालांकि, निवेशकों को सेक्टर से जुड़े कुछ रिस्क भी ध्यान में रखने चाहिए, जैसे कि कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा। इसके अलावा, नए प्रोजेक्ट्स को तय समय पर पूरा करना कंपनी की बड़ी परीक्षा होगी। निवेशकों की नजर अब मुख्य रूप से 4 गीगावाट सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की प्रोग्रेस और मैनेजमेंट की कॉमेंट्री पर टिकी रहेगी।
