Waaree Energies का रेवेन्यू **23.8%** बढ़ा है, लेकिन एक्सपोर्ट में चुनौतियों के चलते ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पड़ा है। इसके बावजूद Prabhudas Lilladher ने अपना पॉजिटिव रुख बरकरार रखा है।
मार्जिन में क्यों आई गिरावट?
Waaree Energies ने हालिया नतीजों में 23.8% की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो सोलर मॉड्यूल्स की लगातार बढ़ती मांग को दर्शाता है। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 550 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 17.6% रह गया। इसकी मुख्य वजह एक्सपोर्ट में सुस्ती रही, जो अमेरिका की सेक्शन 232 टैरिफ पॉलिसी को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आई है।
ब्रोकरेज का क्या है कहना?
शॉर्ट-टर्म की इन चुनौतियों के बावजूद ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने स्टॉक पर अपना भरोसा बनाए रखा है और ₹3,111 का टारगेट प्राइस दिया है। जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे सेल प्रोडक्शन बढ़ेगा और अमेरिका में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बेहतर होगा, मार्जिन में सुधार देखने को मिलेगा।
భారీ विस्तार और दमदार ऑर्डर बुक
कंपनी ₹300 अरब का भारी-भरकम निवेश प्रोग्राम चला रही है। इसमें 10GW का सोलर सेल प्लांट, बैटरी स्टोरेज, और इनवर्टर कैपेसिटी बढ़ाना शामिल है। मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए ₹70 अरब से ₹77 अरब के ऑपरेटिंग प्रॉफिट का लक्ष्य रखा है।
कंपनी के पास 25.6GW का एक मजबूत ऑर्डर बुक है, जिसकी वैल्यू ₹592 अरब है। रिटेल सेगमेंट की बात करें तो रेवेन्यू 252.9% बढ़कर ₹34.6 अरब रहा है, जिसे कंपनी 2027 तक ₹100 अरब से ₹110 अरब तक ले जाने की योजना बना रही है।
निवेश से पहले रिस्क फैक्टर
निवेशकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि कंपनी का अमेरिका पर ज्यादा निर्भर होना उसे टैरिफ नियमों के प्रति संवेदनशील बनाता है। इतने बड़े पैमाने पर चल रहे खर्च (Capital Spending) को समय पर पूरा करना और निर्यात बाजार में उतार-चढ़ाव को मैनेज करना भविष्य की ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी है।
