Vesuvius India को लेकर एक प्रमुख ब्रोकरेज हाउस ने 'Buy' रेटिंग दी है, जिसकी मुख्य वजह कंपनी का रिफ्रैक्टरी सेक्टर में दबदबा है। हालांकि, हालिया नतीजों में **7.13%** का प्रॉफिट फॉल और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण मार्जिन पर पड़ रहा दबाव निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
डोमेस्टिक रिफ्रैक्टरी सेक्टर में 50-55% मार्केट शेयर रखने वाली कंपनी Vesuvius India को एक ब्रोकरेज फर्म से नई 'Buy' रेटिंग मिली है। ब्रोकरेज का मानना है कि स्टील और फाउंड्री इंडस्ट्री में कंपनी के फ्लो कंट्रोल सॉल्यूशंस का मजबूत पोर्टफोलियो इसे लंबी अवधि में फायदा पहुंचा सकता है। हालांकि, बाजार का मूड फिलहाल कंपनी के हालिया फाइनेंशियल परफॉरमेंस की समीक्षा कर रहा है।
मुनाफे में सुस्ती की वजह
जून 2026 तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 7.13% गिरकर ₹58.51 करोड़ रहा है। उम्मीद से कम रहे इन नतीजों के पीछे बिक्री में कमी और ऑपरेशनल मुश्किलें मुख्य कारण मानी जा रही हैं।
मार्जिन पर तगड़ा दबाव
कंपनी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती ऑपरेटिंग मार्जिन को बचाए रखने की है। मैग्नीशिया जैसे कच्चे माल की कीमतों में उछाल, बढ़ते फ्रेट चार्जेस और रुपये की कमजोरी ने मुनाफे के आंकड़ों को प्रभावित किया है। इन कॉस्ट हेडविंड्स के कारण कंपनी के लिए अपने मार्जिन को प्रोटेक्ट करना मुश्किल हो रहा है, भले ही देश में स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है।
कैपेक्स और भविष्य की राह
कंपनी अब अपनी ग्रोथ के लिए Vizag स्थित नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के साथ-साथ Kolkata और Mehsana के प्लांट्स को अपग्रेड करने पर बड़ा निवेश कर रही है। आने वाले 3 सालों में ये इन्वेस्टमेंट रेवेन्यू बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं, लेकिन निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनी इन विस्तार योजनाओं के दौरान होने वाली ऑपरेशनल चुनौतियों को कैसे संभालती है। यदि नए प्लांट्स पर लागत उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल, स्टॉक की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने मार्जिन को कब तक सामान्य कर पाती है। स्टील सेक्टर पर भारी निर्भरता के चलते, निवेशकों को कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन में सुधार का इंतजार रहेगा।
