Usha Martin ने नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत दमदार की है। कंपनी का EBITDA (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले **44%** बढ़कर सामने आया है। यह उछाल भारत, अमेरिका और यूरोप में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ के कारण संभव हुआ है।
क्यों आया EBITDA में इतना बड़ा उछाल?
Usha Martin के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे कई वजहें हैं। कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी की और साथ ही, ज्यादा मुनाफा देने वाले प्रोडक्ट्स के मिक्स पर फोकस किया। इन दोनों फैक्टर्स ने मिलकर कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट को आसमान पर पहुंचा दिया।
भौगोलिक प्रदर्शन: कहां बूम, कहां धीमा?
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कंपनी के लिए नतीजे मिले-जुले रहे। मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और प्रोजेक्ट्स में देरी के कारण वॉल्यूम में 28% की गिरावट दर्ज की गई। लेकिन, कंपनी ने इस नुकसान की भरपाई दूसरे क्षेत्रों में मजबूत मांग से कर ली।
घरेलू मोर्चे पर, कंपनी के रोप (Rope) बिजनेस में 12% वॉल्यूम ग्रोथ देखी गई, जिसका मुख्य कारण एलिवेटर और माइनिंग सेक्टर से लगातार मिल रही मांग है। वहीं, वायर बिजनेस ने भी रफ्तार बनाए रखी और 19% की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की।
नए प्रोडक्ट्स और भविष्य की रणनीति
Usha Martin सिर्फ अपने पारंपरिक प्रोडक्ट्स पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि नए रेवेन्यू स्ट्रीम्स बनाने की कोशिश कर रही है। कंपनी ने हाल ही में एक खास कंस्ट्रक्शन मटेरियल, प्लास्टिक LRPC का अपना पहला इंटरनेशनल ऑर्डर हासिल किया है। साथ ही, OceanFibre प्रोडक्ट लाइन भी सफल साबित हो रही है। ये कदम कंपनी को स्पेशलाइज्ड और हाई-वैल्यू सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद करेंगे।
मार्जिन पर पकड़ और भविष्य की राह
सबसे अहम बात यह है कि कंपनी 20.1% के हेल्दी प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने में कामयाब रही, वो भी तब जब स्टील, एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन जैसी लागतें बढ़ रही थीं। कंपनी ने लागत वृद्धि का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाला और प्रोडक्शन एफिशिएंसी बढ़ाई, जिससे मुनाफा बरकरार रहा।
विश्लेषकों की भी इस नतीजे पर पैनी नजर है। ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने FY28 और FY29 के लिए अपने अर्निंग अनुमानों को क्रमशः 2.3% और 0.8% बढ़ाया है। उन्होंने सितंबर 2028 की अनुमानित कमाई के 25 गुना वैल्यूएशन के आधार पर टारगेट प्राइस ₹594 तय किया है।
हालांकि, निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या भारत और पश्चिमी देशों में ग्रोथ मिडिल ईस्ट से रिकवरी में देरी होने पर भी कंपनी के प्रदर्शन को बनाए रख पाती है। साथ ही, स्टील और एनर्जी जैसे रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे स्थिर रखती है, यह भी अहम होगा। नए इंटरनेशनल ऑर्डर्स की समय पर डिलीवरी भी कंपनी के ग्रोथ टारगेट को पूरा करने की क्षमता का एक महत्वपूर्ण संकेत होगी।
