Collar Strategy: गिरते बाजार में पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने का अचूक तरीका

BROKERAGE-REPORTS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Collar Strategy: गिरते बाजार में पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने का अचूक तरीका

Collar स्ट्रैटेजी एक डिफेंसिव इन्वेस्टमेंट तरीका है, जो मार्केट की गिरावट से बचाव के साथ हेजिंग की लागत को भी कम रखता है। इसमें स्टॉक होल्डिंग्स के साथ पुट और कॉल ऑप्शन का इस्तेमाल करके रिस्क को मैनेज किया जाता है।

वोलटाइल मार्केट में अक्सर निवेशक अपने लॉन्ग-टर्म होल्डिंग्स को बेचे बिना पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के तरीके ढूंढते हैं। 'कॉलर स्ट्रैटेजी' (Collar Strategy) इसी उद्देश्य से बनाई गई एक डिफेंसिव फ्रेमवर्क है। साधारण हेजिंग की तुलना में, यह रिस्क प्रोटेक्शन और उसके खर्च के बीच एक बेहतर बैलेंस बनाता है।

कॉलर स्ट्रैटेजी कैसे काम करती है?

इस स्ट्रैटेजी में तीन पोजीशन एक साथ ली जाती हैं: अंडरलाइंग स्टॉक को होल्ड करना, प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन खरीदना और एक कॉल ऑप्शन बेचना (Writing)। यहाँ पुट ऑप्शन एक इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह काम करता है। यदि स्टॉक की कीमत गिरती है, तो पुट ऑप्शन आपको एक निश्चित 'स्ट्राइक प्राइस' (Strike Price) पर शेयर बेचने का अधिकार देता है, जिससे नुकसान की एक लिमिट तय हो जाती है।

हालांकि, पुट ऑप्शन खरीदना महंगा हो सकता है, जिससे आपके रिटर्न्स पर असर पड़ता है। इस खर्च की भरपाई के लिए, निवेशक आमतौर पर मौजूदा मार्केट वैल्यू से ऊपर के स्ट्राइक प्राइस पर कॉल ऑप्शन बेचते हैं। इस कॉल को बेचने से मिलने वाला प्रीमियम पुट ऑप्शन की लागत को कवर कर देता है। इसे अक्सर 'जीरो-कॉस्ट' या कम लागत वाली हेजिंग कहा जाता है।

निवेशकों के लिए जरूरी बातें और रिस्क

कॉलर स्ट्रैटेजी जहां बाजार की भारी गिरावट से बचाव देती है, वहीं इसके कुछ ट्रेड-ऑफ भी हैं। सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे आपके मुनाफे की सीमा (Upside Potential) सीमित हो जाती है। यदि स्टॉक की कीमत कॉल ऑप्शन के स्ट्राइक प्राइस से काफी ऊपर चली जाती है, तो आप उस अतिरिक्त मुनाफे में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

निवेशकों को 'असाइनमेंट रिस्क' (Assignment Risk) का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि एक्सपायरी पर स्टॉक का भाव कॉल स्ट्राइक से ऊपर रहता है, तो आपके शेयर कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार बिक सकते हैं। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में कई लेनदेन शामिल होते हैं, जिससे ब्रोकरेज और ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है। यह स्ट्रैटेजी स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग के लिए नहीं, बल्कि कैपिटल प्रोटेक्शन के लिए बेहतर मानी जाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.