मंथली एक्सपायरी के दौरान डेरिवेटिव्स पोजीशन को अगली सीरीज में ले जाने की प्रक्रिया, यानी 'रोलओवर' को ट्रैक करना जरूरी है। इससे यह पता चलता है कि बाजार की चाल में कितना दम है और बड़े ट्रेडर्स का रुख क्या है।
शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव भरे सफर में 'मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी' अक्सर रिटेल निवेशकों के लिए उलझन का विषय होती है। जैसे ही मौजूदा महीने के कॉन्ट्रैक्ट्स खत्म होते हैं, ट्रेडर्स को यह तय करना होता है कि वे अपनी पोजीशन काटें या उसे अगले महीने के लिए 'रोलओवर' करें। यह रोलओवर प्रोसेस असल में स्मार्ट मनी और बड़े इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स के नजरिए का एक आईना है।
क्यों जरूरी है रोलओवर डेटा?
जब भारी संख्या में पोजीशन को अगले महीने के लिए आगे बढ़ाया जाता है, तो यह संकेत देता है कि ट्रेडर्स को मौजूदा बाजार ट्रेंड पर पूरा भरोसा है। इसके उलट, अगर बड़ी तादाद में कॉन्ट्रैक्ट्स बंद हो रहे हैं, तो समझ लीजिए कि बड़े खिलाड़ी प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं या भविष्य को लेकर सतर्क हैं। यह निवेशकों के लिए एक ऐसा मौका है जिससे वे यह जान सकते हैं कि बाजार की तेजी असल है या सिर्फ दिखावा।
ओपन इंटरेस्ट (OI) और प्राइस मूवमेंट का खेल
रोलओवर को समझने के लिए सिर्फ भाव देखना काफी नहीं है। इसके साथ Open Interest (OI) पर नजर रखना बेहद जरूरी है। अगर बाजार में तेजी के साथ OI भी बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि नया पैसा बाजार में आ रहा है। वहीं, अगर कीमतें बढ़ रही हैं लेकिन रोलओवर प्रतिशत कम है, तो यह इस बात की चेतावनी है कि मौजूदा रैली सिर्फ सट्टेबाजी (Speculation) पर आधारित है, न कि लंबी अवधि के निवेश पर।
जोखिम का प्रबंधन (Risk Management)
एक्सपायरी के समय बाजार में भारी वोलेटिलिटी (Volatility) देखने को मिलती है। ऐसे समय में रोलओवर डेटा आपको बाजार की सेहत का एक दूसरा पक्ष दिखाता है। इसे कभी भी अकेले इस्तेमाल न करें; इसे हमेशा फंडामेंटल एनालिसिस और ग्लोबल फैक्टर्स के साथ जोड़कर देखना चाहिए। अगर आप यह समझ गए कि बड़े खिलाड़ी अपनी पोजीशन को रोलओवर कर रहे हैं या हटा रहे हैं, तो आप अपने पोर्टफोलियो को रिस्क से बेहतर ढंग से बचा पाएंगे।
