UTI AMC Share Price: AUM पर असर, पर इन वजहों से ब्रोकरेज ने कहा 'Add', Target ₹1,200!

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AuthorNeha Patil|Published at:
UTI AMC Share Price: AUM पर असर, पर इन वजहों से ब्रोकरेज ने कहा 'Add', Target ₹1,200!
Overview

UTI Asset Management (UTI AMC) ने हाल ही में Q4 FY26 के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹3.9 लाख करोड़** पर स्थिर रहा, लेकिन निवेशकों के कम यील्ड वाले पैसिव फंड की ओर जाने के कारण रेवेन्यू में **5%** की गिरावट आई है। इसके बावजूद, ब्रोकरेज हाउस ने स्टॉक पर 'Add' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस बढ़ाकर **₹1,200** कर दिया है।

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पैसिव फंड ने घटाया यील्ड

एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में एक बड़ा ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहाँ निवेशक तेजी से कम फीस वाले पैसिव फंड्स की ओर बढ़ रहे हैं। UTI AMC के नतीजे भी इसी का असर दिखा रहे हैं। हालाँकि, कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेल्स नेटवर्क के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि AUM को बढ़ाया जा सके। इस रणनीति पर विश्लेषकों का भरोसा बना हुआ है।

Q4 FY26 में यील्ड पर दबाव

Q4 FY26 में UTI AMC का क्वार्टरली एवरेज एसेट अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) ₹3.9 लाख करोड़ के आसपास बना रहा, जो कि एक हद तक स्थिरता दिखाता है। मगर, रेवेन्यू में करीब 5% की गिरावट आई और यह ₹375 करोड़ पर आ गया। इसकी मुख्य वजह निवेशकों का कम मार्जिन वाले पैसिव फंड्स की तरफ जाना है, जिससे रेवेन्यू यील्ड घटकर 39.1 बेसिस पॉइंट रह गई। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी ज्यादा AUM तो मैनेज कर रही है, लेकिन प्रति यूनिट कमाई कम हो रही है। EBITDA मार्जिन 39.3% रहा, जो कि 'अन्य खर्चों' (other expenses) में बढ़ोतरी की वजह से थोड़ा प्रभावित हुआ।

दबाव के बावजूद विश्लेषकों का भरोसा

कम यील्ड के बावजूद, UTI AMC का मैनेजमेंट FY26 में अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर जोर दे रहा है। कंपनी ज्योग्राफिकली विस्तार कर रही है, युवा निवेशकों को टारगेट करने और SIPs को बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में निवेश कर रही है, और सेल्स व डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क को मजबूत कर रही है। म्यूचुअल फंड AUM, खासकर SIPs के जरिए बढ़ाना एक बड़ा लक्ष्य है। इन रणनीतियों को देखते हुए, विश्लेषकों ने 'Add' रेटिंग को बनाए रखा है और मार्च 2027 तक के लिए टारगेट प्राइस को 9% बढ़ाकर ₹1,200 कर दिया है। हालाँकि, कुछ बढ़े हुए खर्चों के कारण उन्होंने FY27-28 के लिए PAT अनुमानों को 2-3% घटाया है।

इंडस्ट्री ट्रेंड्स और वैल्यूएशन

पैसिव फंड्स की ओर यह बदलाव भारत के एसेट मैनेजमेंट सेक्टर में एक बड़ा ट्रेंड है। अप्रैल 2026 तक, पैसिव AUM ₹50 लाख करोड़ तक पहुँच गया था, जो 2020 में सिर्फ ₹1.63 लाख करोड़ था। HDFC AMC और ICICI Prudential AMC जैसे बड़े कंपटीटर्स भी इसी तरह के यील्ड दबाव का सामना कर रहे हैं। UTI AMC का TTM P/E 23.85x है, जो HDFC AMC (46.30x) और Nippon India AMC (43.93x) जैसे प्रतिद्वंद्वियों से काफी कम है। यह डिस्काउंट शायद इसके छोटे मार्केट शेयर और कम मार्जिन के कारण है। सेक्टर का मीडियन P/E 31x है, ऐसे में UTI AMC थोड़ा ज्यादा आकर्षक वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, भले ही इसकी ग्रोथ धीमी हो सकती है।

मुख्य रिस्क: बढ़ते खर्च और SEBI के नियम

विश्लेषकों के भरोसे के बावजूद, कुछ जोखिम बने हुए हैं। 'अन्य खर्चों' में बढ़ोतरी पर नजर रखनी होगी; अगर ये स्थायी हो जाते हैं, तो EBITDA मार्जिन (39.3%) और कम हो सकता है। यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SEBI के नए एक्सपेंस रेशियो नियम (1 अप्रैल, 2026 से लागू) AMC के प्रॉफिट मार्जिन को कम करने का लक्ष्य रखते हैं। FY26 में UTI AMC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 45% घटकर ₹404 करोड़ रह गया था, जो दिखाता है कि अर्निंग्स खर्चों और मार्केट के प्रति कितनी संवेदनशील है। Q4 FY26 में कंपनी को ₹66.7 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस भी हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है। MarketsMojo जैसे प्लेटफॉर्म ने स्टॉक को 'Attractive' से 'Fair' कैटेगरी में डाउनग्रेड किया है, जिसका कारण बढ़ता P/E और सीमित नज़दीकी अवधि की ग्रोथ बताई गई है।

आउटलुक: फ्लो के जरिए ग्रोथ

UTI AMC का भविष्य फंड फ्लो बनाए रखने और मजबूत निवेश प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। AUM को बढ़ाने और पैसिव फंड्स से कम यील्ड की भरपाई करने के लिए एक मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बहुत महत्वपूर्ण है। मैनेजमेंट का कॉस्ट कंट्रोल और एफिशिएंसी पर ध्यान रखना आगे चलकर अहम साबित होगा। ब्रोकरेज हाउसेज ने भले ही रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन बढ़े हुए खर्चों को देखते हुए अनुमानों में मामूली समायोजन किया है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या UTI AMC के टेक्नोलॉजी और सेल्स में किए गए निवेश से आगे चलकर प्रॉफिटेबल AUM ग्रोथ हासिल की जा सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.