UBS के एनालिस्ट्स का मानना है कि भारतीय इंटरनेट कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन उनके मजबूत ग्रोथ और लो मार्केट पेनिट्रेशन के चलते सही है। हालांकि, टेलीकॉम सेक्टर में सुस्त टैरिफ ग्रोथ और बढ़ते कॉम्पिटिशन के कारण ब्रोकरेज ने सतर्क रुख अपनाया है।
भारतीय निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि ग्लोबल मार्केट एक्सपर्ट्स डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडिशनल टेलीकॉम ऑपरेटरों को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। UBS की हालिया रिपोर्ट बताती है कि भले ही भारतीय इंटरनेट कंपनियों की वैल्यूएशन महंगी लग रही हो, लेकिन लंबी अवधि के मजबूत ग्रोथ ट्रेंड्स इसे सपोर्ट कर रहे हैं। इसके विपरीत, टेलीकॉम सेक्टर के लिए आउटलुक थोड़ा संभला हुआ है, जिसका मुख्य कारण सेक्टर में बढ़ता मुकाबला है।
इंटरनेट वैल्यूएशन और ग्रोथ की कहानी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इंटरनेट कंपनियां अपने EBITDA के 30 से 50 गुना पर ट्रेड कर रही हैं। UBS के एनालिस्ट्स का कहना है कि यह प्रीमियम इसलिए वाजिब है क्योंकि भारत का इंटरनेट सेक्टर सालाना 25% से 30% की दर से बढ़ रहा है, जो एशिया के कई अन्य बाजारों से तेज है। भारत में ऑनलाइन रिटेल और फूड डिलीवरी की पैठ अभी केवल 9% से 10% है, जबकि अन्य देशों में यह आंकड़ा 20% से 30% तक है, जो भविष्य में बड़े विस्तार की संभावना जताता है।
हालांकि, UBS के APAC टेलीकॉम, मीडिया और इंटरनेट हेड नवीन किला का मानना है कि हर कंपनी पर दांव लगाना सही नहीं होगा। निवेशकों को उन मार्केट लीडर्स पर ध्यान देना चाहिए जो मुनाफे की ओर अनुशासित तरीके से बढ़ रहे हैं, न कि सिर्फ टॉप-लाइन ग्रोथ दिखाने वालों पर।
टेलीकॉम सेक्टर का हाल
टेलीकॉम सेक्टर पर ब्रोकरेज का रुख थोड़ा नरम है। रिपोर्ट के अनुसार, अब टैरिफ में भारी बढ़ोतरी का दौर धीमा हो सकता है। UBS का अनुमान है कि अगले तीन सालों में ARPU ग्रोथ 8% से 8.5% के आसपास रह सकती है, जो पिछले ऐतिहासिक स्तरों से कम है। Vodafone Idea जैसे छोटे ऑपरेटर्स की स्थिति सुधरने के बावजूद, मार्केट में कॉम्पिटिशन अभी भी बहुत ज्यादा है, जिससे बड़ी कंपनियों के लिए कीमतों में तेजी से बदलाव करना मुश्किल है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
पोर्टफोलियो में बदलाव करते समय यह अंतर समझना जरूरी है। इंटरनेट स्टॉक्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती ग्रोथ से मुनाफे की ओर बढ़ने की है। वहीं, टेलीकॉम सेक्टर के निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनियां उम्मीद के मुताबिक टैरिफ बढ़ा पाती हैं या सेक्टर की ग्रोथ केवल इकोनॉमिक पैटर्न तक ही सीमित रह जाएगी।
