भारतीय टेलीकॉम कंपनियां दिसंबर 2026 से अपने टैरिफ प्लान में **15%** तक की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही हैं। इसका मुख्य मकसद ARPU (प्रति यूजर औसत रेवेन्यू) को सुधारना और सेक्टर की फाइनेंशियल सेहत को मजबूत बनाना है।
भारत की टेलीकॉम कंपनियां अपने रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए एक बड़े प्लान पर काम कर रही हैं। खबरों के मुताबिक, दिसंबर 2026 से मोबाइल टैरिफ में 15% की बढ़ोतरी हो सकती है। जानकारों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है और 2031 तक हर दो साल में 12% की और बढ़ोतरी की जा सकती है ताकि सेक्टर का मुनाफा बना रहे।
Vodafone Idea के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?
Vodafone Idea पर कर्ज का भारी बोझ है, जिसमें सालाना ₹21,600 करोड़ का वैधानिक बकाया भी शामिल है। कंपनी का लक्ष्य 2028 तक ₹17,100 करोड़ का कैश EBITDA हासिल करना है। इसके लिए जरूरी है कि प्रति यूजर रेवेन्यू (ARPU) को 2030 तक ₹300 के पार ले जाया जाए।
Bharti Airtel और Reliance Jio की रणनीति
मार्केट लीडर्स Bharti Airtel और Reliance Jio का पूरा जोर अपने 5G इंफ्रास्ट्रक्चर से बेहतर रिटर्न पाने पर है। अनुमान है कि 2029 तक इन कंपनियों की ग्रोथ रेट 15% से 16% के बीच रह सकती है। नेटवर्क में हो रहे भारी निवेश की लागत वसूलने के लिए कीमतों में इजाफा करना इनका मुख्य लक्ष्य है।
रेगुलेटरी माहौल और निवेशकों के लिए रिस्क
Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) का रुख फिलहाल कंपनियों के लिए सपोर्टिव है, जो उन्हें मार्केट के हिसाब से दाम तय करने की आजादी देता है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि अधिक दाम होने से 'सब्सक्राइबर चर्न' (ग्राहकों का नेटवर्क छोड़ना) का रिस्क बना रहता है। आने वाले समय में कंपनियों के सब्सक्राइबर बेस और डेट मैनेजमेंट पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
