Tata Technologies के Q2 FY27 नतीजों में मिले-जुले संकेत देखने को मिले हैं। कंपनी ने **$138 मिलियन** का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट तो हासिल किया है, लेकिन बढ़ती मजदूरी और सब-कॉन्ट्रैक्टिंग लागत के चलते मुनाफे के मार्जिन पर भारी दबाव बना हुआ है।
नतीजों का हाल और मार्जिन का दबाव
कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 1.9% (कॉन्स्टेंट करेंसी) रही, जो उम्मीदों के मुताबिक है। हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन अनुमानों से 70 बेसिस पॉइंट्स नीचे रहे। मुनाफे में आई इस गिरावट की मुख्य वजह सालाना वेतन वृद्धि और बढ़ती सब-कॉन्ट्रैक्टिंग लागत है, जिसका EBITDA मार्जिन पर 100 बेसिस पॉइंट्स का असर पड़ा है।
ऑर्डर्स की भरमार
मार्जिन की चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने बड़ी डील हासिल करने का सिलसिला जारी रखा है। इस तिमाही में 5 बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स मिले, जिसमें सबसे प्रमुख एक यूरोपीय लक्जरी ऑटोमेकर के साथ हुआ $138 मिलियन का फुल-व्हीकल इंजीनियरिंग प्रोग्राम है। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब कंपनी ने $100 मिलियन से अधिक का बड़ा सौदा हासिल किया है।
ब्रोकरेज की क्या है राय?
Prabhudas Lilladher ने कंपनी की FY27 और FY28 की रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः 21.7% और 13.0% कर दिया है। इसके बावजूद, लागत बढ़ने के कारण उन्होंने अगले 3 सालों के लिए EBITDA मार्जिन अनुमान घटा दिए हैं।
ब्रोकरेज ने स्टॉक पर 'Reduce' रेटिंग बरकरार रखी है। उनका मानना है कि कंपनी का मौजूदा वैल्यूएशन—जो FY28 और FY29 के अनुमानित अर्निंग्स के 28x और 24x पर ट्रेड कर रहा है—उसके फंडामेंटल ग्रोथ के मुकाबले काफी महंगा है। उन्होंने टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹670 जरूर किया है, लेकिन निवेशकों को चेताया है कि फिलहाल शेयर में सीमित उछाल की ही गुंजाइश दिख रही है।
