Motilal Oswal ने Tata Motors पर अपनी 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखी है और शेयर के लिए **₹434** का टारगेट प्राइस तय किया है। कंपनी ने रेवेन्यू में मजबूत ग्रोथ और कमर्शियल व्हीकल की बिक्री में **26%** की बढ़ोतरी दर्ज की है, लेकिन ब्रोकरेज ने बढ़ती कमोडिटी कीमतों के कारण मार्जिन में दबाव की चिंता जताई है। स्टॉक **13 अगस्त 2026** को **₹474.80** पर बंद हुआ था।
Motilal Oswal की Tata Motors पर राय
ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने Tata Motors पर अपनी 'Neutral' रेटिंग को बनाए रखा है और शेयर के लिए ₹434 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। यह रिपोर्ट कंपनी की FY27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद आई है। 13 अगस्त 2026 को बाजार बंद होने पर, स्टॉक ₹474.80 पर ट्रेड कर रहा था, जो ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस से अधिक है।
नतीजों पर एक नजर
Tata Motors ने FY27 की पहली तिमाही में ₹2,560 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 83% अधिक है। हालांकि, इस मुनाफे में Tata Capital में किए गए निवेश से मिले मार्क-टू-मार्केट लाभ का बड़ा योगदान रहा, न कि अकेले ऑटोमोटिव ऑपरेशंस से। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 23% की मजबूत सालाना ग्रोथ देखी गई। कमर्शियल व्हीकल (CV) की बिक्री 26% बढ़कर 1,08,700 यूनिट रही।
मार्जिन पर दबाव और लागतें
ब्रोकरेज के सतर्क रुख का एक मुख्य कारण प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ रहा दबाव है। स्टैंडअलोन EBITDA मार्जिन 11.7% रहा, जो पिछले साल की तुलना में 60 बेसिस पॉइंट (या 0.6%) कम है। यह गिरावट स्टील और रबर जैसी बढ़ती कमोडिटी कीमतों का असर दिखाती है, जो ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी हैं। ये इनपुट कॉस्ट्स कंपनी के प्रति यूनिट मुनाफे को कम कर रही हैं।
मिश्रित बाजार का नजरिया
स्टॉक को लेकर बाजार की राय अलग-अलग है। जहाँ Motilal Oswal वैल्यूएशन और मार्जिन दबाव को देखते हुए 'Neutral' रुख बनाए हुए है, वहीं दूसरी ब्रोकरेज फर्मों का नजरिया भिन्न है। उदाहरण के लिए, Nomura ने ₹554 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' रेटिंग दी है, जबकि CLSA ने ₹596 के टारगेट के साथ 'Outperform' रेटिंग दी है। ये अलग-अलग टारगेट प्राइस, इनपुट लागत वृद्धि को संभालने और भविष्य की वॉल्यूम ग्रोथ को लेकर कंपनी की क्षमता पर ब्रोकरेज की भिन्न धारणाओं को दर्शाते हैं।
निवेशक क्या ट्रैक करें?
आगे चलकर, शेयरधारकों के लिए मुख्य फोकस यह होगा कि कंपनी अपनी इनपुट लागतों को कितनी प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर पाती है। निवेशक Jaguar Land Rover (JLR) सेगमेंट से जुड़े अपडेट्स पर भी नजर रखेंगे, जिसने हाल ही में सप्लाई चेन की दिक्कतों और मॉडल ट्रांजिशन के दौरान दबाव का सामना किया है। इसके अलावा, कमर्शियल व्हीकल की मांग की निरंतरता और कंपनी की नेट-कैश पोजीशन (जो 30 जून 2026 तक ₹7,100 करोड़ थी) को बनाए रखने की क्षमता, वित्तीय स्थिरता के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।
